
चुनाव तो हम प्रतिपल ही करते हैं, पर क्या वह हमारे मन को और स्पष्टता देते हैं, शांत करते हैं या उसे और बंधनों में जकड़ देते हैं?
कई बार सही चुनाव तो कर लेते हैं पर उसमें तीव्रता और आवृष्टि नहीं होती। इसी कारण जीवन में बदलाव नहीं आ पाता है।
गलत चुनाव एक गलत जीवन को जन्म देता है। जब जीवन गलत होता है तो आमतौर पर मन दुनिया को अपना दुश्मन समझ बैठता है।
इन्हीं सब बातों में जीवन बीत जाता है।
यह कोर्स एक मौका है उन सभी के लिए जो ज़िन्दगी में सही चुनाव को वरीयता देता चाहते हैं और वास्तव में बदलाव लाने में उत्सुक हैं।
प्रतिपाल सही चुनाव जीवन को ऐसी ऊँचाइयों पर ले जा सकता है जिसके हम सभी हक़दार हैं।
आचार्य प्रशांत का यह सरल कोर्स "सही चुनाव कैसे करें?" श्वेताश्वेतर उपनिषद के अध्याय 3 पर आधारित है।
श्वेताश्वतर उपनिषद् का स्थान ईशादि दस प्रधान उपनिषदों में है। इसके वक्ता श्वेताश्वतर ऋषि हैं। इस उपनिषद् की विवेचनशैली बड़ी ही सुसम्बद्ध और भावपूर्ण है। यह उपनिषद् कृष्ण यजुर्वेदीय शाखा के अन्तर्गत है। इसमें कुल छ: अध्याय हैं।
यह पाठ्यक्रम अध्याय 3 के उन्नीसवें और बीसवें श्लोक पर आधारित है। अध्याय 1 में जगत कारण का निर्णय कर प्रण व चिन्तन पूर्वक ध्यानाभ्यास को ही उसके साक्षात्कार का साधन बताया गया है। इसका विशेष विवरण अध्याय 2 में है। अध्याय 2 में ध्यान की विधि व ध्यान के योग्य स्थान, यौगिक क्रियाओं का वर्णन व आत्म साक्षात्कार से सम्बंधित प्रश्नों पर प्रकाश डाला गया है। अध्याय 3 में एक सफल जीवन व उसकी उच्चतम संभावना पर चर्चा की गयी है।
आचार्य प्रशांत की इस स्पष्ट व सरल व्याख्या से आत्म साक्षात्कार का वास्तविक अर्थ पता चलता है।
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