
शारीरिक ताक़त बढ़ाने के तो बहुत तरीके हमें पता हैं, पर क्या कुछ ऐसे भी तरीके हैं जो मानसिक ताकत बढ़ा सकें?
और क्यों है ज़रूरत मानसिक ताकत बढ़ाने की?
शारीरिक उम्र तो बीतती जा रही है, पर आज भी मन छोटी-छोटी बातों में उलझता है। ज़िन्दगी के हर तराज़ू पर अपनी अहमियत तोलता है।
"उसने ऐसा क्यों कहा होगा मेरे बारे में?" "क्या मेरी कोई अहमियत नहीं?" "लोग मेरी बात पर ध्यान क्यों नहीं देते?" "सबको बुलाया, पर मुझे क्यों नहीं?"
समझ की कमी के कारण हमारा मन खुद को कमज़ोर और टूटा हुआ पाता है। यही कमज़ोरी फ़िर उसे विचलित करती है, और यह चक्र कभी समाप्त ही नहीं होता।
यह कोर्स उन सभी के लिए जो मानसिक कमज़ोरियों के चक्र से बाहर आकर एक अस्पर्शित, अटूट और अविचलित जीवन जीना चाहते हैं।
आचार्य प्रशांत का यह आसान वीडियो कोर्स "मानसिक ताकत कैसे बढ़ाएँ?" एक मौका है अपनी कमज़ोरियों से ऊपर उठने का। यह कोर्स श्वेताश्वतर उपनिषद् के अध्याय 3 पर आधारित है।
श्वेताश्वतर उपनिषद् का स्थान ईशादि दस प्रधान उपनिषदों में है। इसके वक्ता श्वेताश्वतर ऋषि हैं। इस उपनिषद् की विवेचनशैली बड़ी ही सुसम्बद्ध और भावपूर्ण है। यह उपनिषद् कृष्ण यजुर्वेदीय शाखा के अन्तर्गत है। इसमें कुल छ: अध्याय हैं।
यह पाठ्यक्रम अध्याय 3 के पहले से तीसरे श्लोक पर आधारित है। अध्याय 1 में जगत कारण का निर्णय कर प्रण व चिन्तन पूर्वक ध्यानाभ्यास को ही उसके साक्षात्कार का साधन बताया गया है। इसका विशेष विवरण द्वितीय अध्याय में है। अध्याय 2 में ध्यान की विधि व ध्यान के योग्य स्थान, यौगिक क्रियाओं का वर्णन व आत्म साक्षात्कार से सम्बंधित प्रश्नों पर प्रकाश डाला गया है। अध्याय 3 में एक सफल जीवन व उसकी उच्चतम संभावना पर चर्चा की गयी है।
आचार्य प्रशांत की इस स्पष्ट व सरल व्याख्या से सफलता के वैदिक सूत्रों का पता चलता है।
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