
साधारण चेतना को हमेशा दो दिखाई देते हैं, हमेशा एक मूल-भेद दिखाई देता है। वह मूल-भेद है कि हम दुनिया और खुद को अलग-अलग देखते हैं। वह रही दुनिया और यह रहा मैं। यह चेतना देखने वाले को "मैं" कहती है और दिखाई देने वाले को कहती है "संसार"। इस कोर्स में साधारण चेतना और विशुद्ध चेतना के संसार को देखने के परिपेक्ष्य को समझेंगे।
आगे आदिशंकराचार्य जी ने ध्यान की विधियों पर व्यंग्य किया है। लोगों को लगता है कि इन विधियों का पालन करने से उन्हें कोई आध्यात्मिक लाभ हो जाएगा। ऐसी दृष्टि कोई काम की नहीं है जो ध्यान के नाम पर शरीर के किसी अंग पर जाकर ठहर गई है। शरीर को नहीं बल्कि ब्रह्म को देखना है। ब्रह्म के अतिरिक्त कोई और दृष्टि अगर भा गई है तो तुम्हारी दृष्टि अब निर्मल नहीं है। दूसरी बात यह भी है कि ब्रह्म को विषय कैसे बनाओगे? इस कोर्स में ध्यान की विधि और ब्रह्म मात्र को विषय बनाने पर गहन से चर्चा होगी।
वैसे तो यह ग्रंथ हज़ारों वर्ष पुराना है परन्तु आचार्य प्रशांत द्वारा की गई व्याख्या इसको आज की पीढ़ी के लिए अत्यंत सरल व प्रासंगिक बना देती है। अपरोक्षानुभूति के प्रकाश में अपने जीवन को एक नई दिशा दीजिए, आचार्य प्रशांत के साथ इस सरल कोर्स में।
आप जिस उत्तर की तलाश कर रहे हैं वह नहीं मिल रहा है? कृपया हमारी सपोर्ट टीम से संपर्क करें।
वीडियो श्रृंखला के सभी वीडियो-सत्र सिर्फ़ इस प्लेटफार्म पर उपलब्ध हैं। (कुछ वीडियो के कुछ हिस्से किन्हीं सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध हो सकते हैं। हालाँकि, इनकी संरचना, परीक्षण और प्रक्रियाओं के साथ पूरा पाठ्यक्रम इस प्लेटफॉर्म के अलावा कहीं और उपलब्ध नहीं है।)
यहाँ उपलब्ध सभी वीडियो श्रृंखला आचार्य जी के पहले से रिकॉर्डेड वीडियो का संकलन है। यह कोई लाइव वीडियो नहीं हैं इसलिए आप इन वीडियो श्रृंखलाओं से कभी भी जुड़ सकते हैं और अपने हिसाब से इनके वीडियो-सत्र देख सकते हैं।
वीडियो श्रृंखला की न्यूनतम सहयोग राशि संस्था के न्यूनतम आर्थिक ज़रूरतों को ध्यान में रखते हुए रखी गयी है।
संस्था जिस जन-जागरण आन्दोलन के साथ आगे बढ़ रही है, वो मूलतः व्यक्तिगत और सामाजिक सुधार के लिए है। इसलिए व्यापक स्तर पर बदलाव लाने के लिए संस्था को अधिक संसाधनों की आवश्यकता है। आपके द्वारा किया जाने वाला योगदान समाजिक उत्थान के रूप में वापिस आप तक ही पहुँचता है। इसलिए अधिक योगदान कर संस्था को बल दें जिससे वह आपकी और सहायता कर सके।
वीडियो श्रृंखला की एनरोलमेंट की प्रक्रिया पूरी होने के बाद आप उसको आजीवन देख सकते हैं।
हाँ, आप वीडियो श्रृंखला का कोई भी वीडियो सत्र कितनी भी बार देख सकते हैं। वीडियो सत्र को बीच में रोकने, पीछे जाने, या आगे बढ़ने की सुविधा भी उपलब्ध है।
यह हमारे लिए बहुत प्रसन्नता की बात है कि इस वीडियो श्रृंखला से आपकी सहायता हुई और अब आप संस्था की मदद करना चाहते हैं। सबसे पहले हम आपसे निवेदन करेंगे कि आप अपना पूरा अनुभव हमारे साथ support@advait.org.in पर साझा करें। ऐसा करने के बाद आप 'शेयर' बटन का उपयोग कर इस वीडियो श्रृंखला के विषय में अपने मित्रों को बता सकते हैं, या संस्था को यहाँ जाकर अनुदान भी कर सकते हैं।