🧔🏻♂आचार्य प्रशांत गीता पढ़ा रहे हैं। घर बैठे लाइव सत्रों से जुड़ें, अभी फॉर्म भरें — https://acharyaprashant.org/hi/enquiry-gita?cmId=m00021 📚 आचार्य प्रशांत की पुस्तकें पढ़ना चाहते हैं? फ्री डिलीवरी पाएँ: https://acharyaprashant.org/hi/books?cmId=m00021 📲 आचार्य प्रशांत की मोबाइल ऐप डाउनलोड करें: Android: https://play.google.com/store/apps/details?id=org.acharyaprashant.apbooks iOS: https://apps.apple.com/in/app/acharya-prashant/id1603611866 📝 चुनिंदा बोध लेख पढ़ें, खास आपके लिए: https://acharyaprashant.org/en/articles?l=1&cmId=m00021 ➖➖➖➖➖➖ #आचार्यप्रशांत #Acharyaprashant #आत्मसम्मान #डर #समाज #परिवार #अपराधबोध #SocialPressure #PeoplePleasing #GuiltTripping #CorporateLife #TruthWithoutApology वीडियो जानकारी: 25.11.2025, भगवद गीता सत्र, बेंगलुरु Title: तुम सुविधा और सुरक्षा चाहते हो, इसीलिए लोग तुम्हें दबाते हैं (दबना छोड़ो, झुकना छोड़ो) || आचार्य प्रशांत (2025) 📋 Chapters: 00:00 - Intro 01:36 - समाज से डरने की कीमत 10:31 - नौकरी छोड़ने में डर लगता है 22:31 - तुम इसलिए दब जाते हो 29:28 - गिल्ट मत पालो: तुम दोषी नहीं 35:59 - झुको मत, ठसक से जियो 45:08 - Testimonial विवरण: इस वीडियो में आचार्य प्रशांत जी समझाते हैं कि “सोशल नॉर्म्स” के नाम पर किया गया झुकना अक्सर डर और स्वार्थ होता है; मजबूरी में बाहरी समझौता हो भी जाए तो भीतर यह साफ़ रहना चाहिए कि यह गलत है, क्योंकि गलत के साथ सहज हो जाना ही पतन है। वे कॉर्पोरेट नौकरी और कर्ज़ के उदाहरण से बताते हैं कि आज़ादी भावुकता से नहीं, योजना, अनुशासन और भीतर की आग से आती है—खर्चों की जिम्मेदारी निभाते हुए भी व्यक्ति अपने आराम घटाकर बंधनों को काट सकता है। साथ ही सोशल मीडिया पर जल्दी आहत होने की प्रवृत्ति पर वे कहते हैं कि जो झूठ में जीता है वही जल्दी टूटता है, और सच बोलने से अगर किसी को ठेस लगे तो उसका अपराधबोध ढोना आपकी जिम्मेदारी नहीं। 🎧 सुनिए #आचार्यप्रशांत को Spotify पर: https://open.spotify.com/show/3f0KFweIdHB0vfcoizFcET?si=c8f9a6ba31964a06 ~~~