🧔🏻♂आचार्य प्रशांत गीता पढ़ा रहे हैं। घर बैठे लाइव सत्रों से जुड़ें, अभी फॉर्म भरें — https://acharyaprashant.org/hi/enquiry-gita?cmId=m00021 📚 आचार्य प्रशांत की पुस्तकें पढ़ना चाहते हैं? फ्री डिलीवरी पाएँ: https://acharyaprashant.org/hi/books?cmId=m00021 📲 आचार्य प्रशांत की मोबाइल ऐप डाउनलोड करें: Android: https://play.google.com/store/apps/details?id=org.acharyaprashant.apbooks iOS: https://apps.apple.com/in/app/acharya-prashant/id1603611866 📝 चुनिंदा बोध लेख पढ़ें, खास आपके लिए: https://acharyaprashant.org/en/articles?l=1&cmId=m00021 ➖➖➖➖➖➖ #AcharyaPrashant #आचार्यप्रशांत #Philosophy #BhagavadGita वीडियो जानकारी: 27.10.24, गीता दीपोत्सव, ग्रेटर नॉएडा जो सही हो वो करो, चाहे पसंद हो या न पसंद हो || आचार्य प्रशांत (2024) 📋 Video Chapters: 0:00 - Intro 1:04 - भगवद् गीता का सरल काव्यात्मक अर्थ 2:56 - कठ उपनिषद् श्लोक 1.2.1 5:24 - अहम्, आत्मा और प्रकृति के बीच का संबंध 09:54 - आत्मा और सांसारिक सुख में अंतर 13:16 - श्रेय और प्रेय के बीच का अंतर 20:05 - धर्म को परिधि (Circumference) से केंद्र तक लाना 28:52 - घर और जीवन में किताबों का महत्व 35:04 - धर्म को जीवन के केंद्र में रखने की जरूरत 45:08 - श्रेय के मार्ग में आने वाली कठिनाइयाँ 49:23 - माया और सत्य का आकर्षण 57:10 - आत्मविश्वास और श्रद्धा एक साथ नहीं चल सकते 1:07:22 - अपने जीवन की सच्ची स्थिति को पहचानना 1:12:45 - प्रेय और फ्रीडम (Freedom) की गलत परिभाषा 1:15:48 - धर्म और ग्लैमर (Glamour) का अंतर 1:19:32 - संत साहित्य में पीड़ा और आनंद का महत्व 1:27:15 - समापन विवरण: आचार्य प्रशांत ने अहंकार, अशांति, और आत्मा के गहरे संबंधों को सरलता से स्पष्ट किया। उन्होंने बताया कि अहंकार का स्वभाव ही अशांति है, और सच्ची शांति आत्मा के अनुभव से आती है। संसार क्षणिक सुख (temporary happiness) तो दे सकता है, लेकिन सच्चा आनंद (true bliss) आत्मा की पहचान में है। आज लोग सत्य (श्रेय) के बजाय संसारिक सुख (प्रेय) चुनते हैं, क्योंकि सत्य के मार्ग पर अहंकार का विसर्जन (ego dissolution) आवश्यक होता है। धर्म को जीवन के केंद्र में रखने के बजाय सुविधा के अनुसार परिधि पर रखा जाता है, जिससे आध्यात्मिकता केवल दिखावे तक सीमित रह जाती है। श्रद्धा (faith) को आत्मविश्वास (self-confidence) के टूटने के रूप में परिभाषित करते हुए उन्होंने समझाया कि सत्य के प्रति पूर्ण समर्पण (surrender) ही शांति का मार्ग है। यह चर्चा जीवन और आध्यात्मिकता में संतुलन लाने का मार्ग दिखाती है। 🎧 सुनिए #आचार्यप्रशांत को Spotify पर: https://open.spotify.com/show/3f0KFweIdHB0vfcoizFcET?si=c8f9a6ba31964a06 अन्यच्छ्रेयोऽन्यदुतैव प्रेयस्ते उभे नानार्थे पुरुषः सिनीतः । तयोः श्रेय आददानस्य साधु भवति हीयतेऽर्थाद्य उ प्रेयो वृणीते ॥ १ ॥ ~ कठोपनिषद् श्लोक 1.2.1 अन्वय: श्रेयः = जो कल्याणकारी है ; अन्यत् = अलग है; उत = और; प्रेयः = जो प्रिय लगता है; अन्यत् एव = अलग ही है; ते = वे; नानार्थे = भिन्न-भिन्न अर्थ में; उभे = दोनों; पुरुषम् = मनुष्य को; सिनीतः = बाँधते हैं; तयोः = उन दोनों में से; श्रेयः = कल्याण के साधन को; आददानस्य = ग्रहण करने वाले का; साधु भवति = कल्याण होता है; उ = परंतु जो; प्रेयः वृणीते = प्रिय को चुनता है; स: = वह; अर्थात् = अर्थ से; हीयते = भटक जाता है ॥ १ ॥ ------------------------ अर्थ: श्रेय और प्रेय दोनों अलग-अलग हैं। ये दोनों मनुष्य को अपने अर्थ से बाँधते हैं। जो श्रेय को चुनता है उसका कल्याण होता है और जो प्रेय को चुनता है वह अपने मूल लक्ष्य से भटक जाता है ॥ १ ॥ संगीत: मिलिंद दाते ~~~~~