दूसरों को सिद्ध करने की ज़रुरत क्यों? || आचार्य प्रशांत, युवाओं के संग (2013)

वक्ता: पहले मैं तुमसे सवाल पूछूँगा: दूसरों के सामने अपने को सही सिद्ध करना ज़रूरी क्यों हैं?
श्रोता १: सर, अगर कोई कुछ गलत कह रहा है, तो बुरा लगता है।
वक्ता: बुरा क्यों लगता है?
श्रोता १: सर, हम सही हैं, फिर भी गलत बन जाते हैं।
वक्ता: तुम सही हो अगर, तब तो बिलकुल भी बुरा नहीं लगाना चाहिए।
श्रोता १: सर, बुरा क्यों नहीं लगेगा?
वक्ता: सीमा, मेरी बात समझो।
*(वक्ता जानबूझ कर प्रश्नकर्ता का गलत नाम लेते हैं। गलत नाम लेने पर सब हँसते हैं*। *प्रश्नकर्ता आरज़ू स्वयं भी हंसती है*।)
