“Verily, Verily, I say unto thee, Except a man be born again, he cannot see the kingdom of God. Except a man be born again, he cannot see the kingdom of God.“
~Jhon (3:3)
“मैं तुझ से सच सच कहता हूँ, यदि कोई नये सिरे से न जन्मे तो परमेश्वर का राज्य देख नहीं सकता।”
~Jhon (3:3)
आचार्य प्रशांत: “एक्सेप्ट अ मैन बी बॉर्न अगेन, ही कैन नॉट सी द किंगडम ऑफ़ गॉड”
डर लगा? ये तो मारने की बात कर रहे हैं। ‘द्विज’ शब्द बड़ा महत्वपूर्ण है, द्विज समझते हो? जिसका दूसरा जन्म हुआ हो। भारत ने इस शब्द को बड़ा महत्त्व दिया है – द्विज। जो हिंदी अनुवाद है, वहाँ पर भी वो शब्द आ रहा है। पहला जन्म शरीर का होता है, ठीक,पहला जन्म सिर्फ शुरुआत होती है। पहला जन्म सिर्फ जैसे भूमिका लिखी गयी हो। जैसे प्रस्तावना लिखी गयी हो असली कहानी की। पहला जन्म तो समझ लो ऐसा है कि अभी गर्भ में आए, ताकि जन्म हो सके। पहले जन्म को जन्म न मानना। पहले जन्म को तो गर्भस्थ होना मानना।
किसी कवि ने कहा है कि हम सब गर्भों में जीते हैं। अगर मुझे ठीक से याद है तो कहा है “हम सब घटनाओं के जाये हैं, संदर्भो में जीते हैं, पैदा अभी हम हुए नहीं, हम सब गर्भों में जीते हैं।” कवि इन पंक्तियों में ऋषि बन गया है – “पैदा अभी हम हुए नहीं, हम सब गर्भों में जीते हैं।”


