वक्ता: सपने क्यों? आंख खोलो और जियो! सपने तो इस बात की निशानी हैं कि आंख बंद है।
क्यों, किसलिए? पर मैं समझ रहा हूँ कि तुम कहाँ से आ रहे हो। तुम आ रहे हो वहाँ से जहाँ पर बड़े-बड़े लोगों ने कई बार तुमको ये कहा है कि जीवन में आगे वही बढ़ता है, जो सपने लेता है। तुमने ऐसी बातें सुनी हैं कि ऊँचा उड़ने के लिए, सपने बड़े देखो। तुमने बहुत लोगों की आत्मकथा में पढ़ लिया है कि उसने अपने सपनों को हकीकत में बदला और इसी कारण वो महान था। और ये सब मूर्खतापूर्ण बातें पढ़-पढ़ करके तुमको ये लगता है कि जीवन का अर्थ ही यही है कि सपने लो और उनके पीछे भागो।
तुम ये नहीं समझ रहे हो कि सपने लेने वाला कौन है? इसलिए कह रहा हूँ कि मत कहो कि सपने अच्छे हैं या बुरे हैं। सपने चीज़ क्या हैं ये समझ लो। ये सपनों का पूरा मामला क्या है? ये समझ लो कि ये सपने आते कहाँ से हैं और कोई इन्हें कब लेता है। कितने लोग यहाँ बैठ करके सपने ले रहे हो अभी?
(कोई भी श्रोतागण हाथ नहीं उठाता)
हाथ नहीं उठा रहे हो, एक दूसरे को देख रहे हो। कुछ न कुछ सपने देखने वाले, यहाँ बैठे ज़रूर होंगे। जीवन में हर पल उतना ही कीमती है होता है जितना ये है। अगर अभी सपने नहीं ले रहे हो तो कभी भी सपने क्यों लेते हो? तुम कहोगे कि सर अभी तो सपने नहीं ले रहा पर बाहर जाकर सपने ले सकता हूँ। नहीं! जैसे ये पल कीमती है वैसे ही वो पल भी कीमती होगा जब बाहर जाओगे। क्या अभी तुम जान रहे हो कि सपने नहीं लेने हैं। अभी सपने क्यों नहीं लेने?
श्रोता १: क्योंकि अभी वर्तमान में हैं।


