श्रोता: ‘*अबोर्ड हियर आफ्टर*, एंड इन्डीड द अबोर्ड हियर आफ्टर, इज़ बेस्ट फॉर दी कांशेंशिअस।’
वक्ता: देखिये ये जो बातें उतरती हैं, कही जाती हैं, ये ध्यान की गहराई से कही जाती हैं, शब्द वहां से आते हैं, जो शब्द जिस तल से आ रहा हो, उसको उसी तल पर समझना पड़ेगा। ये शब्द ज्ञान के, ध्यान के, गहरे तल से आते हैं।
कहा जा रहा है, “*एंड द लाइफ ऑफ़ दिस वर्ल्ड इज़ नथिंग बट प्ले एंड स्पोर्ट एंड इन्डीड द अबोर्ड हियर आफ्टर इज़ बेस्ट फॉर द कांशेंशिअस सो वोंट यू अंडरस्टैंड*’’ अगर इसको बहुत ध्यान से नहीं पढ़ा, तो ऐसा लगेगा जैसे कहा जा रहा है कि कोई और दुनिया है, किसी परलोक की बातें हो रही हैं।
श्रोता: अगले जन्म में।
वक्ता: किसी और जन्म की बातें हो रही हैं। मृत्योपरांत कुछ और होगा, उसकी बात हो रही है। नहीं, ये नहीं कहा जा रहा है, समझिये इस बात को। ‘*दिस वर्ल्ड’ और ‘अबोर्ड हियर आफ्टर**,*’ ये यहाँ पर की-वर्ड्स हैं। दिस वर्ल्ड से क्या आशय है? दिस वर्ल्ड से आशय है वो दुनिया, जो इन्द्रियों से प्रतीत होती है। तो कहा गया है, ये सब जो कुछ है, इसको गंभीरता से मत ले लेना। “लाइफ ऑफ़ दिस वर्ल्ड इज़ नथिंग बट प्ले एंड स्पोर्ट” इससे रास करो, प्ले एंड स्पोर्ट, तुरंत एक इनसे सम्बंधित शब्द मन में उठना चाहिये: लीला। कुरान में लीला शब्द नहीं आया है, पर इशारा ठीक उधर को ही है, लीला। ये सब कुछ उसकी लीला है, इस लीला के पीछे वही है, इस लीला ‘में’ वही है; और जब कहा जा रहा है अबोर्ड हियर आफ्टर, तो वो समय में और स्थान में किसी और जगह की बात नहीं हो रही कोई खास, विशिष्ट जगह नहीं है, जन्नत, जहाँ तुम्हें कुछ मिल जाएगा! देखो सांसारिक मन लेकर पढ़ोगे, तो संसार में तो दो ही चीजें होती हैं: समय और स्थान। सांसारिक मन लेकर पढ़ोगे तो बिलकुल ऐसा ही लगेगा कि ये पंक्तियाँ कह रही हैं कि


