उन लोगों के लिए उपयोगी है जो लगातार दूसरों पर भावनात्मक रूप से निर्भर रहते हैं।
आचार्य प्रशांत की यह पुस्तक उन लोगों के लिए उपयोगी है जो लगातार दूसरों पर भावनात्मक रूप से निर्भर रहते हैं। पुस्तक पढ़कर यह स्पष्ट होता है कि सच्ची स्वतंत्रता किसी के साथ होने में नहीं, बल्कि स्वयं को समझने में है। भाषा सहज है, लेकिन विचार गहरे हैं।