प्रश्न: चरित्र को नर-मादा संबंधो में ही क्यों देखा जाता है इस समाज में? और क्या किया जाए, अगर लोगों में ऐसी धारणा है तो किया क्या जाए?
वक्ता: आचरण, चरित्र, यह एक ही धातु से निकले हैं| आप यहाँ मेरे सामने बैठे हो, सौ गुण हो सकते हैं आपके, गुण माने विशेषताएँ, उपाधियाँ, मुझे क्या दिखाई देगा?
आपके सौ गुण हैं, पर मुझे क्या दिखाई देगा?
सिर्फ एक-दो गुण, कौन से?
जो काम सम्बंधित है, मुझे उसके अलावा कुछ नहीं दिखाई देगा| तो आप पूछ रहे हो कि भारतीय समाज में चरित्र को काम से ही क्यों जोड़ दिया गया है? क्योंकि जो लोग देख रहे हैं उनको काम के अलावा कुछ समझ में ही नहीं आता| जब समाज ऐसा हो कि पुरुष और स्त्री मिलते ही एक वजह से हों, और क्या वजह?
चलो, सेक्स करेंगे!
श्रोता: लेकिन समाज में नहीं है ऐसा|
वक्ता: और? ऐसा ही है बिलकुल…


