महत्वपूर्ण है वो टलता रहा, व्यर्थ से जीवन भरता रहा || आचार्य प्रशांत, संत रूमी पर (2015)

They ask, “When someone passes eighty then they play. Will they play before eighty?” I say.
~ Rumi
वक्ता: रूमी कह रहे हैं कि यह सवाल तो बड़ा आम है कि “उम्र बढ़ जाएगी, ज़िन्दगी बीत जाएगी उसके बाद क्या?” पंक्तियाँ हैं कि “अस्सी के बाद क्या ज़िन्दगी में मौज, खेल, क्रीड़ा, आनंद रहेगा?” वह कहते हैं, “मैं पूछता हूँ कि क्या अस्सी के पहले है?” अस्सी समझ लो ज़िन्दगी का आख़िरी सिरा, अस्सी समझ लो ज़िन्दगी का आख़िरी दिन; उसको इंगित करा गया अस्सी कह कर के।
तो लोग पूछ रहे हैं कि “उस दिन के बाद क्या है?” रूमी कह रहे हैं, “यह सवाल बड़ा महत्वपूर्ण नहीं है, ज़्यादा ज़ायज सवाल यह है कि उससे पहले क्या है? यह मत पूछो कि पूरी उम्र बिताने के बाद क्या होगा? और न ही यह पूछो कि मौत के बाद क्या होगा? उससे ज़्यादा बड़ा और प्रस्तुत प्रश्न और प्रकट प्रश्न और महत्वपूर्ण प्रशन यह है कि आज क्या कर रहे हो? और जो आज ही ठीक नहीं जी रहा, उसका कल ठीक कैसे हो सकता है?”
और यह बड़ी मज़ेदार बात है कि जो आज ठीक नहीं जी रहे होते हैं, उन्हें ही कल की ज़्यादा चिंता होती है। ज़्यादातर लोग जिन्हें भविष्य की बड़ी चिंता होती है, वह वही लोग हैं जिनका वर्तमान उखड़ा हुआ होता है। अभी आप खुल नहीं पा रहे हैं, अभी आप जी नहीं पा रहे हैं, फूल नहीं पा रहे हैं; अभी आप अपने भ्रमों को दूर नहीं कर पा रहे हैं, आप अपने आप को बस बहाना दिए जा रहे हैं। और बहाना क्या है? “कल कर लूँगा।” क्या बहाना है?

