
संघर्ष में हम सभी हैं; ज़िंदगी युद्ध तो है ही। दूसरे को क्या दिखाना चाहते हो? अपनी चोट, अपनी हार या अपना हौसला? अपना हौसला दिखाओ न दूसरे को!
बचना ऐसे लोगों से जो बार-बार तुम्हें अपनी चोट और अपने घाव दिखाते हों। उसके पास जाना जिसके पास चोट भी…

यह सब अय्याशियाँ होती हैं, “मन कर रहा है, मन नहीं कर रहा है, आज दिल तन्हा सा है, उदास सा है।“ यह क्या है? मन गया भाड़ में! इधर काम रखा हुआ है, जो ज़रूरी चीज़ है वह करेंगे न, मन का क्या है!

मुक्तिका उपनिषद् है, उसमें राम ही कह रहे हैं, ‘एक उपनिषद् को कोई पढ़ ले वो तर जाएगा।‘ अच्छा एक में काम नहीं होता तो चलो जो १० या ११ प्रमुख उपनिषद् हैं उनको पढ़ लो! अच्छा उनसे भी काम नहीं होता तो लो मैं सूची दिए देता हूँ १०८…

परीक्षाओं में सफल होने के, चयनित होने के किसके आसार ज़्यादा हैं, एक अशांत मन के या एक शांत परीक्षार्थी के? और शांति और स्पष्टता हमेशा साथ-साथ चलते हैं।
अगर जीवन में स्पष्टता होगी, तो फिर परीक्षाओं में भी चयन होने की संभावना बढ़ जाएगी।
यह लो, आध्यात्म का व्यवहारिक

सफलता ऐसे नहीं देखी जा सकती कि कौन कहाँ पहुँचा। सफलता ऐसे नापिए कि किसने कितनी चुनौतियों का सामना किया आगे बढ़ने के लिए। व्हाट आर द ऑड्स (चुनौतियाँ क्या थीं), बाधाएँ क्या थी? तुम जितना भी आगे बढ़े हो, उतना आगे बढ़ने के लिए तुमने कितना जीता है, कितना…

ज़िंदगी में पहले कुछ बन जाओ, कोई आंतरिक मक़ाम हासिल कर लो, फिर तुम्हें समझ में आएगा न कि रिश्ता किससे बनाना है। अब रिश्ता बना लिया छब्बीस की उम्र में ही, तुम्हारा लक्ष्य हो सकता है ज़िंदगी में ऊँचा उठना; जिससे तुमने रिश्ता बना लिया उसे ना उठने से…

ज़िन्दगी में पहले कुछ बन जाओ, कोई आंतरिक मक़ाम हासिल कर लो, फिर तुम्हें समझ में आएगा न कि रिश्ता किससे बनाना है। अब रिश्ता बना लिए छब्बीस की उमर में – तुम्हारा लक्ष्य हो सकता है जीवन में ऊपर उठना हो, जिससे तुमने रिश्ता बना लिया है उसे ना…

अगर यही बात है कि काम चुनना है कि, “काम क्या करें?” वह काम चुनो जिसमें तुम सबसे कमज़ोर हो। लेकिन अगर ऐसा काम चुनोगो तो तनख्वाह भी कम मिलेगी तो अधिकांश लोग वह काम चुनते हैं जिसको बोलते हैं, ‘मेरी स्ट्रेंथ (शक्ति)।‘ जबकि आध्यात्मिक दृष्टि से देखो तो तुम्हें…

आचार्य प्रशांत: हिंदुस्तान में जानते हो न दस-लाख लोग आवेदन भरते हैं और चयन होता है दो-सौ का। ऐसे ही चलता है न? कितना प्रतिशत हुआ ये? प्रश्नकर्ता: एक-प्रतिशत भी नहीं हुआ। आचार्य: कितना हुआ? तुम्हें अध्यात्म की नहीं, मैथ्स (गणित) की ज़रूरत है। ऐसे नहीं किसी भी काम में…

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, किसी भी काम को करने में मन क्यों नहीं लगता है?
आचार्य प्रशांत: अभी कल ही एक लड़का आया था मुझसे मिलने। वो मध्य प्रदेश के सागर जिले में खाद्य विभाग में काम करता है। नया लड़का है, अभी-अभी नौकरी का एंट्रेंस क्लियर किया है और डेढ़-दो…

प्रश्नकर्ता: दो चीज़ें मेरे साथ एकसाथ हो रही हैं। एक तरफ तो मन में बेचैनी है कि ज़िंदगी व्यर्थ न चली जाए, तो उस बेचैनी के कारण मैं कुछ सार्थक कर के दिखाना चाहता हूँ। पर जो कुछ करने निकलता हूँ उसमें सफलता माँगता हूँ और सफलता अगर नहीं मिलती…

प्रश्नकर्ता: सर, सफलता के लिए एजुकेशन (शिक्षा) चाहिए या नहीं और अगर चाहिए तो कैसी एजुकेशन लेनी चाहिए?
आचार्य प्रशांत: लोअर एजुकेशन (निचले स्तर की शिक्षा) वो है जो तुम्हें तुमसे बाहर की ओर ले जाए, जो हम बचपन से पढ़ते चले आ रहे हैं। नाम क्या बताया?

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी प्रणाम, आपसे जो भी सत्संग सुना है उसमें ईमानदारी शब्द बार-बार दोहराया गया है। मेरी जिज्ञासा ये है कि जीवन में ईमानदारी और सफलता दोनों को एक साथ कैसे साझा जा सकता है?
आचार्य प्रशांत: पहले ईमानदारी से ये पता तो करो और मानो तो कि सफलता…

प्रश्नकर्ता: सर, जीवन में ऐसी परिस्थितियाँ आती है जब अपने लक्ष्य के लिए पूरी मेहनत करने के बावजूद सफलता नहीं मिलती, हिम्मत पूरी तरह से टूट जाती है। ऐसे में कुछ भी करने का मन नहीं करता, कोई मोटिवेशन काम नहीं आता। ऐसी परिस्थिति से बाहर कैसे निकलें?
आचार्य प्रशांत:…

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, आध्यात्मिक दृष्टिकोण से सफल जीवन क्या है? एक इंसान का दुनिया में आने का उद्देश्य क्या है? जीवन की सफलता निर्धारित करने में पैसे का कितना महत्व है?
आचार्य प्रशांत: आध्यात्मिक दृष्टिकोण से सफल जीवन क्या है? यह जानना है तो देखिये कि जीवन असफल कब हो…

आचार्य प्रशांत: तुम मुझे बताओ 'सफलता' क्या है?
प्रश्नकर्ता: काम करने के बाद जो खुशी मिलती है उसे सफलता बोलते हैं।
आचार्य: अगर मैं काम करने के बाद खुश हूँ तो काम करने के दौरान मैं कैसा हूँ?

प्रश्नकर्ता: क्या सफ़लता सब कुछ होती है समाज के लिए? क्या हमें सिर्फ सफ़लता से ही मतलब होना चाहिए।
आचार्य प्रशांत: समाज तो यही चाहता है! समाज तो यही चाहता है कि तुम एक पूर्व निर्धारित राह पर चलो और उस राह पर जो जितनी ज़ोर से चले और जितनी…

प्रश्नकर्ता: जैसे राबिया और हसन के वक्त में राबिया ने कहा कि सत्य बताने का एक टाइम आएगा और तभी तुम उस बात को जानोगे क्या इसकी तुलना ऐसे हो सकती है कि जब तक अपना वक्त नहीं आता, अच्छे वक्त की चाभी नहीं मिलती।
आचार्य प्रशांत: बहुत बुरा वक्त…

(दिवस 1)
प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, प्रणाम।
मेरा नाम निधीश है। शुरू से ही मैं निर्णय लेने में बहुत कमज़ोर रहा हूँ। मैंने इंजीनियरिंग करने का निर्णय भी दूसरों के प्रभाव में लिया था। इंजीनियरिंग ख़त्म हो चुकी है और अब मुझे आगे के करियर का चुनाव करना है। आप से…

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, बचपन से जो लोगों ने सिखा दिया है, उसकी वजह से मैं भुगत रहा हूँ। अब क्या करूँ?
आचार्य प्रशांत: देखो, व्यवहारिक होकर देखा करो। किसी की भी गलती हो, भुगत कौन रहा है? जल्दी बताओ। तुम बिलकुल सही जा रहे हो अपनी सड़क पर। और सड़क…

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, प्रणाम। बच्चों को लेकर चिंतित रहती हूँ। क्या औरत को सिर्फ़ घर में एक चूल्हे में सिमट जाना चाहिए? वो आगे बढ़ने की कोशिश करे या परिवार के दायित्व में बंध कर रह जाए? और बच्चे भी उसी में उलझ गए हैं, वो आगे बढ़ने की कोशिश…

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, आपकी सफलता के पीछे क्या राज़ है?
आचार्य प्रशांत: राज़ कुछ भी नहीं है। बात सिर्फ इतनी सी थी कि सक्सेस (सफलता) वगैरह का कभी बहुत सोचा नहीं। हर कदम पर जो उचित लगा वो करता गया, उसी से अगला कदम निकलता चला गया। सक्सेस की बात…

प्रश्नकर्ता: प्रणाम आचार्य जी, मुझे अपने कैरियर के प्रति उलझाव सा रहता है। जो काम मुझे करना पसंद है, वह मैं कर रहा हूँ। लेकिन उस काम में जॉब सिक्योरिटी मुझे नहीं दिखती। और इस कारण मैं हमेशा ही चिंतित रहता हूँ। कृपा करके इसका समाधान बताएँ।
आचार्य प्रशांत: ये…

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, आजकल कुछ भी मन नहीं करता करने क — न धन के लिए, न ध्यान के लिए। आलस से भरा रहता हूँ। कुछ कहें।
आचार्य प्रशांत: कौन कह रहा है कि मन कुछ भी करने का नहीं करता? आलस करने का नहीं करता? मन यदि कुछ नहीं…

प्रश्न: आचार्य जी, आपकी सफलता के पीछे क्या राज़ है?
आचार्य प्रशांत: राज़ कुछ भी नहीं है। बात सिर्फ़ इतनी-सी थी कि सक्सेस (सफलता) वगैरह का कभी बहुत सोचा नहीं। हर क़दम पर जो उचित लगा वो करता गया, उसी से अगला क़दम निकलता चला गया। सक्सेस की बात सोचकर…

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, क्या सफलता सिर्फ़ कठोर परिश्रम (हार्ड-वर्क) कर के ही पाई जा सकती है?
आचार्य प्रशांत: देखो, ये प्रश्न बहुत अच्छा उदाहरण है ऐसे सभी सवालों का जिसमें बहुत सारी चीज़ें मान ली गई हैं।

प्रश्न: आचार्य जी, मुझे डर रहता है कि मैं क्रिकेट के मैदान में आउट हो जाऊँगा। मन बार-बार यही याद दिलाता है कि – अगर आउट हो गया तो? ऐसा लगता है मैं स्वयं से ही लड़ रहा हूँ। कुछ भी हो, मुझे बिना लड़े खेलना है। और मैं जब…

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, कई बार जीवन में ऐसे मौके आते हैं, जब हमें लगता है कि कोई काम है जो अवश्य ही होना चाहिए। और वो काम भी ऐसा है, जिसमें समाज की भी भलाई है। लेकिन उस काम करने में ऐसी बाधाएँ महसूस होती हैं, या मानसिक स्थिति इतनी…

आचार्य प्रशांत: अभी एक फ़िल्म आई थी ‘बोहेमियन रहैप्सोडी’। कुछ लोगों ने देखी होगी। उसका नायक जो है जैसा कि जानते ही हो, फ्रेडी मर्करी, उसे एड्स है – कैंसर नहीं, एड्स! कैंसर में तो एक बीमारी होती है, एड्स में तो दस कैंसर होते हैं। कैंसर तो एक बीमारी…

आचार्य प्रशांत: तुममें से कई लोग नौकरी ढूँढने निकलोगे, नौकरी ऐसी देखो जहाँ तुम खेल सको। ये न देखो कि महीने के अंत में पैसे कितने मिलेंगे, ये देखो कि, "क्या ये जगह मेरे खेलने का मैदान बन सकती है? मैं मज़े ले सकता हूँ? मैं मुक्त दौड़ सकता हूँ?"…

श्रोता: सर, जैसे कि माँ हमसे कहती हैं कि तुम्हारे कारण हम अपनी इच्छाएँ पूरी नहीं कर पाए| सर, तो उनकी इच्छा तो यही थी ना कि हम ‘इंजीनियरिंग कॉलेज’ में पढ़ें; तो वो ऐसा क्यों कहती हैं कि हमारे कारण वो अपनी इच्छाएँ नहीं पूरी कर पाए?
वक्ता: बेटा,…

वक्ता: अर्थ माने जानते हैं क्या होता है? अर्थ माने ये होता है कि ये जो है, उसको मैं किसी और रूप में सामने रख रहा हूँ। इसलिए जिसको आपने अर्थ दे दिए, उसको आप कभी समझ नहीं पाएंगे। मन कहेगा, ‘’मैं जान सकता हूँ मात्र तब, जब अर्थ भरूं।…

प्रश्न: क्या हमारे अन्दर सम्पन्नता की भावना होनी चाहिए?
वक्ता: इस सवाल का जवाब देने से पहले ये समझना जरूरी है कि सम्पन्नता का मतलब क्या है? मैं आप लोगों से ही जानना चाहूँगा।श्रोता: ज़्यादा पाने की भावना।श्रोता: उम्मीद से ज़्यादा पाने की भावना।श्रोता: औरों से ज़्यादा

प्रश्न: कुछ महीने पहले जीवन की हर गतिविधि के प्रति उत्तेजना थी, अब नहीं है, समझ नहीं पा रहा हूँ कि चल क्या रहा है। कभी-कभी ऐसा लगता है कि सब पता है लेकिन बार-बार सवाल उठता है, ”क्या मैं इतना कमज़ोर हूँ जीवन को जानने के लिए? मैं ख़ुद…

प्रश्न: सर, जीवन में कुछ चीज़ें हैं जो फ़ायदे की हैं और कुछ नुक़सानदायक| ये बातें तो अनुभव से ही सीखी जा सकती हैं ना?
वक्ता: फ़ायदे का फ़ायदा क्या है? तुम बचपन से ही तो फ़ायदे की तलाश में नहीं थे| तुम्हें ये किसने सिखाया कि फ़ायदा बड़ी बेहतरीन…

(कंस द्वारा आयोजित एक सभा में बालक कृष्ण और एक पहलवान के युद्ध की कहानी के संदर्भ में एक श्रोता प्रश्न पूछते हुए)
प्रश्नकर्ता: ऐसा कैसे हो सकता है कि एक लड़का मल्लयुद्ध में, राज्य के चुने हुए पहलवानों पर भारी पड़ रहा है?

प्रश्न: सफलता क्या है?
वक्ता: प्रश्न है कि सफलता क्या है। और कितने लोग हैं जिनके मन में यह सवाल उठता है?
(श्रोतागण हाथ खड़े करते हैं)

प्रश्न: सर, प्रगति का क्या मतलब होता है ?
वक्ता: खुद सोचो। यह जो तरक्क़ी, प्रगति, विकास है, अर्थ क्या है इसका? और क्या यह हो भी रहा है वास्तव में?
उदित एक बात समझो साफ़ साफ़, अगर मैं वाहन(कार) बनाता हूँ, मैं एक व्यापारी हूँ, बिज़नेसमैन हूँ, जो कारें

श्रोता: सर, ऐसा कहा जाता है कि कठिन परिश्रम ही सफलता की कुंजी है। क्या केवल कठिन परिश्रम ही सफ़लता की कुंजी है?
वक्ता: हिमांशु का सवाल है कि हमें आज तक यही सिखाया गया है कि श्रम सफलता की कुंजी है। हिमांशु जिन्होंने भी ये बोला वो…

वक्ता- निशा का सवाल है कि जीवन में शिक्षा की आवश्यकता है ही क्यों? है किसलिए शिक्षा? ज़िन्दगी चमकाने के लिए, पैसे कमाने के लिए, किसी प्रोफेशन में जाने के लिए? क्या है शिक्षा?
निशा, शिक्षा दो प्रकार की होती है- पहली शिक्षा होती है दुनिया को जानने की। ये…

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ग्रेटर नोएडा। जीबीयू में आयोजित एक कार्यक्रम में पहुंचे आचार्य प्रशांत ने कहा कि महाशिवरात्रि केवल अनुष्ठान का पर्व नहीं, बल्कि यह मनुष्य को अपने भीतर झांकने के लिए प्रेरित करती है। उन्होंने कहा कि शिव को केवल मूर्ति या रूप में सीमित कर देना उनकी व्यापकता को संकुचित करना…





पृथ्वी को बचाने के लिए यूनाइटेड नेशंस की सीओपी ने यह शर्त रखी थी कि 2030 तक वैश्विक तापमान 1.5 डिग्री से अधिक नहीं बढ़ना चाहिए। हमने वह सीमा 2025 में ही लांघ दी है। यह आने वाले बहुत-बहुत बड़े विनाश का संकेत है। आदमी के इतिहास में इससे ख़तरनाक पल कभी नहीं आया। उस ख़तरे को चुनौती देने के लिए ही यह "ऑपरेशन 2030" है, जिसका उद्देश्य है कि आम आदमी में चेतना जगाई जाए — “देखो, तुम्हारा ग्रह विनाश की ओर कितनी तेज़ी से बढ़ रहा है। तुम अपने बच्चों के लिए एक ऐसा ग्रह छोड़कर जा रहे हो, जहाँ आफ़तें ही आफ़तें होंगी।”
मनचलों के लिए दुनिया की…
अगर मैं लगातार खुश ही हूँ तो काम करने के बाद…
जब आप लोग लक्ष्य बनाते हैं, और…
The UGC regulations are only a spark. The explosive material is something far more intimate: the unexamined conviction, lodged in the deepest chamber of the collective psyche, that birth determines worth and that this determination carries divine sanction. The atmosphere itself is the disease; the regulation is at best a painkiller. India’s foundational scriptures contain the strongest possible arguments against caste. The Upanishadic view begins where hierarchy ends.
अध्यात्म की रोशनी जीवन के हर क्षेत्र पर पड़ती है, तो राजनीति पर भी पड़ेगी ही पड़ेगी। ऐसा कुछ नहीं है कि आध्यात्मिक आदमी राजनीति के प्रति अंधा हो जाता है। बल्कि हक़ीक़त तो यह है कि राजनीति को आध्यात्मिक लोगों की बहुत सख़्त ज़रूरत है, क्योंकि राजनेता ताक़त की ऐसी गद्दियों पर बैठते हैं, जहाँ से वो आपके जीवन को बहुत तरीके से प्रभावित करते हैं। राजनेता अगर आध्यात्मिक नहीं है, तो देश रसातल में जाएगा। राजनीति त्यागनी नहीं है, सही राजनीति करनी है।https://acharyaprashant.org/en/articles/raajneeti-mein-adhyatm-kyon-zaroori-1_795988a15
This article is related to restlessness.