
आज से १ लाख वर्ष पीछे जाओ तो अरबों-खरबों जानवर थे, हज़ारों-लाखों प्रजातियों के; और मनुष्य थे कुछ लाख, अधिक-से-अधिक। अब आदमी हो गए हैं ८ अरब और जानवर बचे हैं (हाथों से कम मात्रा दर्शाते हुए) इतने से!
साहब!
जानवर भी कौन से बचे हैं बताइए? जो मनुष्य के…

पृथ्वी पर नहीं है इतने संसाधन कि तुम बच्चे पैदा करे ही जा रहे हो, करे ही जा रहे हो। और मैं जो बोलूँगा वो बात बहुत चुभेगी, बता देता हूँ!
इस समय पृथ्वी पर बच्चा पैदा होने से ज़्यादा अशुभ काम दूसरा नहीं है। मातम का काम है अगर…

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी प्रणाम स्वीकार करें। हाल ही में कश्मीर में एक छोटी बच्ची को बड़ी बर्बरता से मार दिया गया। मैं जब भी इस तरह की किसी घटना के बारे में सुनती हूँ तो बुरी तरह से बेचैन हो जाती हूँ और अपने-आप को असहाय, बेबस पाती हूँ, अवसाद…

प्रश्नकर्ता: प्रणाम आचार्य ज़ी! आध्यात्मिक व्यक्ति की सामाजिक लाइफ़ (ज़िंदगी) कैसी होनी चाहिए? जीवन में मित्र और रिश्ते भी आवश्यक हैं लेकिन आध्यात्मिक लोगों की संख्या कम है, माया में लिप्त लोगों की ज़्यादा। सामाजिक पक्ष जीवन का कैसे मजबूत करें? मेरा जीवन कटा-कटा सा महसूस होता है, कहीं भी…

प्रश्नकर्ता: नमस्ते आचार्य जी, डिस्मेंटलिंग ग्लोबल हिंदुत्व (वैश्विक हिंदुत्व की समाप्ति) के नाम से अमेरिका में एक कॉन्फ्रेंस हो रही है। बहुत सारे लोगों का ऐसा मानना है कि यह कॉन्फ्रेंस हिन्दुओं को बदनाम करने की एक साज़िश है।
इसी विषय में, आपके एनआरआई (प्रवासी भारतीय) श्रोता हैं एक, उनकी…

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, आपकी किताब 'कर्म' खरीदने मैं नोएडा के एक बुकस्टोर गया, तो वहाँ के मैनेजर से बात होने लगी। तो बातचीत में एक-दो चीज़ें निकल कर आई। पहली, पिछले पाँच-सात सालों में किताबों की कुछ कैटेगिरी (श्रेणी) ही गायब हो गई है बुकस्टोर से, फिलोसॉफी (दर्शनशास्त्र) और स्प्रिचुएलिटी…

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, छल-कपट को कैसे पहचानें और इससे कैसे बचें?
आचार्य प्रशांत: छल को पहचानने के लिए बहुत निश्छल आँख चाहिए। एक कपटी व्यक्ति दूसरे कपटी व्यक्ति को पहचान तो सकता है, जान नहीं सकता; दोनों बातों में अंतर समझना।
जानने का मतलब है मुक्त हो जाना, पहचानने का

प्रश्नकर्ता: प्रकृति मनुष्य के साथ भेदभाव क्यों करती है? किसी को बलवान पैदा करती है, किसी को कमज़ोर; किसी का दिमाग जन्म से तेज़ होता है, किसी का मंद होता है।
आचार्य प्रशांत: प्रकृति को तुम्हारी चेतना से कोई मतलब नहीं है, वो शरीर-भर पैदा कर देती है; और शरीर…

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, मैं जिद्दू कृष्णमूर्ति जी की एक किताब पढ़ रहा हूँ। उसमें वो कई बार वर्णन करते हैं कि अभी का जो करेंट एजुकेशन सिस्टम (वर्तमान शिक्षा व्यवस्था) है, वो ग़लत जा रहा है। तो उनका कहना था कि हमारा एजुकेशन सिस्टम ऐसा होना चाहिए जिससे हम फ्री…

प्रश्नकर्ता: प्रणाम आचार्य जी, हिंदी से ही मेरा प्रश्न है। हिंदी की जो दुर्दशा इस देश में हो रही है कहीं-न-कहीं मुझे लगता है कि इसके जो ज़िम्मेवार हैं वो विद्यालय भी हैं या विद्यालय ही हैं। एक हिंदी के विषय को छोड़कर बाकी सभी विषय, पाठ्यक्रम इंग्लिश भाषा में…

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, कल एक रिकोर्डिंग देखी जिसमें एक महिला एक शांत दिखने वाले और एक गरीब आदमी को सरेआम पीट रही थी। कोई बीच-बचाव करने नहीं आया और शायद पुलिस भी उस आदमी को ही फँसा रही है। मेरे पुराने घाव उघड़ आए क्योंकि मैं भी झूठे दहेज के…

प्रश्नकर्ता: आजकल नेपोटिज्म (भाई-भतीजावाद) इतना फैल क्यों गया है?
आचार्य प्रशांत: हाल ही में ये मुद्दा काफी सुर्खियों में आया है। लोग इसकी बात कर रहे हैं। सवाल उठाए जा रहे हैं। अच्छा है कि आप इसका कारण, इसका मूल कारण जानना चाहती हैं।
क्या है नेपोटिज्म

प्रश्नकर्ता: जिस समाज में मैं प्रतिदिन जी रहा हूँ, उसमें ताक़त और प्रतिष्ठा ही सब कुछ है। जिसकी हैसियत और उपाधि ना हो उसे कोई सुनता भी नहीं और जो समाज में ऊँचे स्थान पर बैठा है, वो कुछ अनर्गल ही क्यों न बके वो परम-सत्य मान लिया जाता है।…

प्रश्नकर्ता: मैं एक डॉक्टर हूँ, पिछले पाँच सालों से मैं देख रहा हूँ कि समाज में कुछ क्षेत्रों के लोगों के लिए इज़्ज़त एकाएक बढ़ गई है। आज कोई भी शिक्षकों को, प्रोफेसरों को, डॉक्टरों को इज़्ज़त या सम्मान या वैसी ही पापुलैरिटी (लोकप्रियता) और रिकॉग्निशन (पहचान) नहीं दे रहा…

प्रश्नकर्ता: सर भाषा से मन बनता भी है और प्रदर्शित भी होता है। बचपन से ही कुछ मुहावरे, जुमले इतने ज़्यादा सुने कि अब वो भीतर की धारणा बन गए हैं। मैं चाहता हूँ कि आप इन पर कुछ बोलें। कुछ उदाहरण हैं — आइए अपना ही घर समझिए, बी…

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, कैसे जानें कि किससे प्रभावित होना है और किससे नहीं होना है? कैसे पता करें कि कोई व्यक्ति हमारा आदर्श बनने लायक है या नहीं?
आचार्य प्रशांत: प्रभावित होने का क्या अर्थ है? प्रभावित होने का अर्थ है कि हम एक स्थिति में हैं, मन हमारा एक…

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, आज आप से सेलेब्रिटी-कल्चर (सेलिब्रिटी संस्कृति) के बारे में बात करना चाहता हूँ। एक आम आदमी का मन इन सेलिब्रिटीज़ से, क्रिकेटर्स से, फिल्मस्टार्ज़ से इतना ज़्यादा क्यों डॉमिनेटेड (शासित) रहता है? उन्हीं के बारे में सोचते हैं, उन्हीं के जैसा हो जाना चाहते हैं, उनकी जैसी …

प्रश्नकर्ता: मैं जब अपनी ज़िन्दगी के बीते सालों को देखता हूँ तो दिखता है कि बहुत कुछ किया जा सकता था पर दूसरे क्या सोचेंगे, क्या कहेंगे, ये ख़्याल कर-करके मैंने कुछ किया नहीं। और आपका जीवन देखता हूँ तो पाता हूँ कि आपने सब कुछ लीग (संघ) से हटकर…

प्रश्नकर्ता: दुनिया में ताकतवर लोगों का ही क्यों बोलबाला है? कमज़ोर और गरीब को हर जगह दबाया क्यों जाता है? भगवान कमज़ोरों की मदद क्यों नहीं करते?
आचार्य प्रशांत: भगवान कमज़ोरों की मदद लगातार कर रहे हैं उनकी कमज़ोरी बन कर। तुम्हें जो कुछ भी मिला हुआ है वो भगवान…

प्रश्नकर्ता: आप कहते हैं कि सामान्य ज़रूरतों के लिए बहुत ज़्यादा पैसों की ज़रूरत नहीं है, पर अगर हमारे पास समय है और सामर्थ्य भी, तो ज़्यादा क्यों न कमाएँ? इस दुनिया में बहुत से सुख हैं जिनको पूरा करने के लिए पैसा चाहिए। उदाहरण के लिए, विश्व भ्रमण करने…

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, आपका अभी-अभी एक वीडियो आया है "तरह-तरह के जानवर।" उसमें काफी लोग ये सवाल पूछ रहे हैं कि आप बोलते रहते हैं कि सही नौकरी करो, सही नौकरी करो। तो ये सही नौकरी होती क्या है? हमें तो अपना पेट भी पालना होता है। आपने तो बोल…

प्रश्नकर्ता: नमस्ते आचार्य जी, बचपन से ऐसी शिक्षा दी जाती है कि बहुत पढ़ो, बहुत कमाओ। नौकरी-छोकरी, यही सिखाया जाता है। और फिर अभी जब पैसा कमाते हैं, तब एक परिस्थिति आती है कि सब सुख हैं, लेकिन आनंद नहीं है। तो अब सत्य कहाँ? सत्य की ओर कैसे जाएँ?…

प्रश्नकर्ता: सनातन धर्म जिसे हम हिंदू धर्म भी कह देते हैं, उसके सामने सबसे बड़ा खतरा क्या है?
आचार्य प्रशांत: देखो, व्यावहारिक रूप से, धर्म की बुनियाद होते हैं धर्मग्रंथ। आदर्श रूप से पूछोगे तो धर्म की बुनियाद होती है आत्मा। धर्म का मतलब होता है आत्मा के अनुसार चलना…

प्रश्नकर्ता: कोरोना वायरस के कारण हुए लॉकडाउन ने मुझे मेरे कई ढर्रों से आज़ाद कर दिया। बहुत कुछ जो छूट ही नहीं रहा था अपने आप छूट गया। पर कल से लॉकडाउन खुल सकता है, वैसे भी सब धीरे-धीरे नॉर्मल होता जा रहा है। मुझे ये लॉकडाउन हमेशा के लिए…

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, मैंने अपने मन को बहुत टटोला, और पाया कि मेरा मन डरा हुआ है और अपने-आपको हीनता भरी निगाहों से देखता है। मुझे इतना जिस चीज़ ने गिराया है वो है मेरी कामुकता। इस कामुकता ने मुझसे बहुत ग़लत काम करवाए हैं, जिससे मैं अपने-आपको बहुत हीन…

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, मानसिकता (मेंटालिटी) का क्या अर्थ है?
आचार्य प्रशांत: मानसिकता का अर्थ होता है- सोचने का एक बंधा हुआ तरीका। मानसिकता का क्या अर्थ होता है? सोचने का एक बंधा हुआ तरीका। मानसिकता कोई भी हो गलत है क्योंकि मानसिकता का अर्थ है कि मन मुक्त नहीं है।…

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, मेरा प्रश्न और मेरी समस्या यह है कि पहले जितना डर था मेरे अंदर, पहले से कम हो गया है लेकिन अब थोड़ा अलग तरीके का डर बना रहता है। डर ये रहता है कि- मतलब मैं संस्था में रहना चाहता हूँ और साधना के पथ पर…

प्रश्नकर्ता: हम जैसे अपने अभिभावकों के लिये एक बोझ की तरह होते हैं। जैसे कि आज मैं यहाँ (शिविर)पर हूँ, तो मेरे घर पर भी बहुत कुछ चल रहा है, कि क्यों मैं चली आयी, तो फिर यह एहसास करवाया जाता है कि तुम्हारी कुछ ज़िम्मेदारियाँ हैं और घर पर…

प्रश्नकर्ता: मनुस्मृति में लिखा है शूद्रों को वेद पुराण नहीं पढ़ने चाहिए और अगर वो सुने या पढ़ें तो उनके कानों में सीसा पिघलाकर डालने का दंड मिले। यहाँ शूद्र से क्या आशय है और ये सब दंड वगैरह की बात क्यों?
आचार्य प्रशांत: देखो कुछ केंद्रीय बातें समझनी होंगी!…

प्रश्नकर्त्ता: आचार्य जी, भारत अब कोरोना महामारी से संक्रमित लोगों की संख्या में चौथे स्थान पर आ चुका है। अमेरिका लंबे समय से सबसे ऊपर, पहले स्थान पर है ही। भारत और अमेरिका दोनों ही जनतंत्र की मिसाल माने जाते हैं। अमेरिका सबसे शक्तिशाली जनतंत्र, और भारत सबसे बड़ा जनतंत्र।…

ऋषियों की विरासत को,
क्रांतिकारियों की शहादत को,
आज कौन कमज़ोर कर रहा मेरे देश की युवा ताक़त को?

प्रश्नकर्ता: आज के समय में व्यक्ति के पतन में फ़िल्मों और टेलीविज़न की बहुत बड़ी भूमिका नज़र आती है। कृपया इस विषय पर कुछ कहें।
आचार्य प्रशांत: बस एक चीज़ है जो अध्यात्म की सबसे बड़ी दुश्मन है, वो है - प्रचलित संस्कृति। और प्रचलित संस्कृति का वर्तमान में सबसे…

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, हम एक छोटे गाँव से बारहवीं करे। अब दिल्ली विश्वविद्यालय के हिंदु कॉलेज में दाखिला पाए। एक साल हो गया है, अच्छा नहीं लग रहा है कुछ। पढ़ाई छूट गई है। यहाँ सुंदर लड़की और अमीर लड़का का ही चलता है। हम सुंदर और अमीर दोनों नहीं…

प्रश्नकर्ता: मैंने देखा है कि मेरे आसपास के सब यार दोस्त लोग जिनका दुनिया में मुँह भी नहीं खुलता, कुछ तो बहुत ही औसत स्तर के हैं, कुछ ऐसे हैं जो फिसड्डी से भी हैं; यह सब लोग ट्विटर और रेडिट वगैरह पर जाकर एकदम योद्धा और सूरमा हो जाते…

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, लोग संस्कृत का मज़ाक उड़ाते हैं, बड़ा दुःख होता है। हाल में भी कुछ लोगों ने सोशल मीडिया पर संस्कृत का अपमान किया।
आचार्य प्रशांत: मैं बहुत सारी बातें बोल सकता हूँ संस्कृत के पक्ष में और वो बातें पारंपरिक तौर से बोली भी गई हैं; कोई…

प्रश्नकर्ता: धार्मिक ग्रंथों में बातें इतनी काव्यात्मक ढंग से क्यों कही जाती हैं? आध्यात्मिक ग्रंथ पढ़ते समय हम पता कैसे करें कि हमने श्लोक का मूल अर्थ समझ लिया है?
आचार्य प्रशांत:

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, आम जन मानस में ये धारणा घर करती जा रही है कि कोरोनावायरस ईश्वरीय प्रकोप है। कृपया कुछ कहें।
आचार्य प्रशांत: नहीं, ईश्वरीय प्रकोप वगैरह तो नहीं है। कोई ईश्वर नहीं बैठा है ऊपर आसमानों में जो वहाँ से वायरस बरसा रहा हो। लेकिन ये जो बात…

प्रश्न: आचार्य जी, कल तेईस मार्च भारत में शहीदी दिवस के रूप में मनाया जाता है। भगत सिंह, सुखदेव, राजगुरु, इनको फाँसी इस दिन मिली थी। तब भगत सिंह मात्र तेईस वर्ष के थे। तो युवाओं को इनसे क्या प्रेरणा लेनी चाहिए अपने जीवन में? आप कृपया मार्गदर्शन करें।
आचार्य…

प्रश्न: सर, आप हमेशा शारीरिक सुंदरता को नीची नज़र से देखते हैं। मैं सुंदर और आकर्षक हूँ। पुरुष मेरी ओर ख़िचते हैं और मुझे इस बात पर नाज़ भी है। सुंदर होना कोई अपराध तो नहीं? पर आपको सुनती हूँ तो ऐसा लगता है जैसे सुंदर होकर मैंने कोई गुनाह…

प्रश्नकर्ता: नमस्कार, आचार्य जी।
सरकार और जितने भी चिकित्सा प्रमुख हैं, जानकार हैं, उन्होंने एक बात साफ-साफ कह दी है कि इस बीमारी का निवारण बहुत साफ है—'सोशल डिस्टन्सिंग'। जबतक एंटीडोट नहीं आ जाता और उसको न जाने कितने साल लगेंगे, तब तक आप एक दूसरे से दूर रहें और…

प्रश्न: आचार्य जी, मुझे अध्यात्म में बहुत कुछ सीखने को मिला है लेकिन मुझे ऐसा लग रहा है जैसे मेरे हाथ में धनुष है, प्रत्यंचा खींची हुई है लेकिन मैं तीर नहीं चला पा रहा हूँ, और मैं तनाव में हूँ। मैं तनाव में क्यों हूँ?
आचार्य प्रशांत: यह तनाव…

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, पर्यावरण को लेकर के बचपन से ही रुझान रहा है और जैसे-जैसे बड़े हुए हैं, उसको विनाश की ओर बढ़ते हुए ही देखा है। काफ़ी इच्छा थी कि इसके लिए कुछ किया जाए पर फिर अपने काम-धाम में ही लग गए। जब कभी भी गाड़ियों में से…

प्रश्न: आचार्य जी, प्रणाम। कल आप बोल रहे थे कि शहीद भगत सिंह के समय पर एक शत्रु था, और वो अंग्रेज़ थे। ये बात उनको पता थी। अपने शत्रु के बारे में उन्हें पता था। इन दिनों अनेक शत्रु हैं, और पता भी नहीं है कि वो हैं कौन।…

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, किसी के साथ कुछ गलत हो रहा है, तो अध्यात्म से कैसे उसे रिलीफ(राहत) मिल सकता है?
आचार्य प्रशांत: राहत मिलने की बात क्या है, अगर कुछ ग़लत हो रहा है तो उस वक्त जितनी भी आपकी सामर्थ्य है, अधिकतम वो करिए।

प्रश्न: स्त्री की सुंदरता से उसकी कोमलता का जो एहसास होता है क्या वह परमात्मा की कोमलता जैसा है?
आचार्य प्रशांत: हमें तो पता था सत्यम-शिवम्-सुंदरम, स्त्री कब से सुन्दर होने लग गई? सत्य सुन्दर होता है, स्त्री पुरुष कब से सुन्दर हुए? कोमलता माने क्या? कोमल कठोर तो पदार्थ…

प्रश्न: आजकल यूट्यूब और आम ज़िन्दगी में गालीगलौज इतनी क्यों बढ़ गई है? कारण क्या है? अभी यूट्यूब और टिकटॉक पर पिछले कुछ दिनों से एक वीडियो वायरल हो रहा है जो गालियों से ही भरपूर है, उसमें और कोई मुद्दे की बात की नहीं गई है।
आचार्य प्रशांत: बेटा,…

प्रश्नकर्ता: प्रिय आचार्य जी, प्रणाम। भारत के अधिकतर विद्यालयों ने अंग्रेज़ी को शिक्षा का माध्यम बना लिया है। लोगों में भी यह भावना बैठ गयी है कि उनकी क्षेत्रीय भाषा को हीन माना जाता है, और यह मान्यता है कि उच्चतम शिक्षा अंग्रेज़ी माध्यम में ही दी जा सकती है।…

प्रश्न: आचार्य जी, स्त्री का पर्दा करना कहाँ तक उचित है?
आचार्य प्रशांत: आसपास लोग ऐसे हों कि वहशी दरिंदे, तो पर्दा ठीक है।
मुझे पता हो कि यहाँ ऐसे लोग हैं जो मेरा मुँह देख के मुझे नोच लेंगे, तो मैं ही पर्दा कर लूँगा। कौन जान मराए? पर

प्रश्नकर्ता: भारतीय समाज में पुराने ज़माने में महिला त्याग, संस्कार, और विनम्रता की मूर्ति हुआ करती थी। आज की आधुनिक महिला ग़लत को 'ग़लत' और सही को 'सही' बोलती है। क्या सही है? वो सही था, या ये सही है?
आचार्य प्रशांत: जो सही है, वो सही है। ना वो…

प्रश्नकर्ता: हिंदी भाषा का जीवन में क्या महत्व है? युवाओं में हिंदी भाषा के प्रति पूर्ण सम्मान व स्वीकार क्यों कम देखने को मिलता है? भारत की संस्कृति में हिंदी भाषा का क्या महत्व व योगदान रहा है?
आचार्य प्रशांत: देखिए, आपका बच्चा भारतीय संस्कृति सीखे, ना सीखे, यह कोई…