

आचार्य नागार्जुन की जीवन कथा का आंरभिक विवरण चीनी भाषा में उपलब्ध है, जिसे क़रीब 405 ई. में प्रसिद्ध बौद्ध अनुवादक कुमारजीव ने उपलब्ध कराया। यह अन्य चीनी एवं तिब्बती वृत्तांत से सहमत हैं कि नागार्जुन दक्षिण भारत में एक ब्राह्मण परिवार में जन्मे थे। ऐतिहासिक रूप से बचपन की…

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, जो आत्मबल है उसमें आत्म का तो पता है, पर यह बल कहाँ से आएगा?
आचार्य प्रशांत: आत्मा का बल कभी आत्मा स्वयं प्रदर्शित करने नहीं आती। वो अपना बल किस पर प्रदर्शित करे, उसके अतिरिक्त तो कुछ है नहीं। तो आत्मा कभी स्वयं नहीं आएगी अपने…

प्रश्नकर्ता: शिवमय होना क्या है?
आचार्य प्रशांत: बहुत मुस्कुरा रहे हो बेटा! यही होता है शिवमय होना। पूछ रहे हैं कि “शिवमय होना क्या होता है?” यही है, सोमस्त हो जाओ। सोम जानते हो न क्या होता है, क्या होता है? ख़ुमार; सोमस्त हो जाओ, यही होता है शिवमय होना।…

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, आपको सुनने से पहले मैं एक भजन सुनता था उसमें बोलते थे कि "सिर से तेरी बहती गंगा, काम मेरा हो जाता चंगा, नाम तेरा जब लेता।" तो भजन सुनते-सुनते मुझे लगता था कि मैं महादेव के कुछ नज़दीक हो गया हूँ और अब मेरा काम चंगा…

प्रश्नकर्ता: शिवलिंग क्या है? इसकी पूजा क्यों की जाती है?
आचार्य प्रशांत: लिंग का जो आध्यात्मिक अर्थ है वो प्रतीक और प्रमाण दोनों होता है। लिंग माने प्रतीक और लिंग माने प्रमाण और इन्हीं दोनों अर्थों के कारण शिवलिंग पूजनीय होता है। एक अर्थ में शिवलिंग द्योतक होता है निराकार…

"या तो पापनाशक जल वाले गंगा तट पर निवास करें या फ़िर मनोहर हार वाले तरुणी स्त्री के वक्षस्थल पर।" ~(श्रृंगार शतकम्, श्लोक ३०)
आचर्य प्रशांत: कमलेश कह रहे हैं, "तीसवाँ श्लोक बहुत अच्छा है, बता दीजिए।''
कमलेश! (प्रश्नकर्ता की तरफ देखते हैं)

प्रश्नकर्ता: नमस्कार आचार्य जी, अन्यथा समाज में अगर कोई अंधविश्वास फैलता है तो वो जान तो नहीं लेता, आंतरिक रूप से मार देता है पर किसी का शरीर तो नहीं हरता। अगर कोरोना वायरस से उठ रही इस वैश्विक महामारी के समय में कोई अंधविश्वास फैल रहा है तो वो…

आचार्य प्रशांत (आचार्य): तुलसीदास उल्लेख करते हैं एक स्थान पर, वहीं से प्रश्नकर्ता ने ये सवाल रखा है: उल्लेख ये है कि ब्रह्मा जी पार्वती जी से शिकायत कर रहे हैं कि शिव आगा-पीछा देखे बिना, विचारे बिना, दान करते रहते हैं। इतना दान दे देते हैं कि उनके पास…

प्रश्नकर्ता (प्र): शिव और शंकर में क्या अंतर है?
आचार्य प्रशांत (आचार्य): आम जनमानस में, आम मन में तो ये एक ही हैं—शिव बोलो कि शंकर बोलो कि भोलेनाथ बोलो कि कैलाशपति बोलो। सहस्त्रों नाम हैं। इनको आप एक ही कह देते हैं। पर अध्यात्म की दुनिया में बाकी सारे…

अचार्य प्रशांत: वास्तव में जब शिव और शक्ति का निरूपण किया जाता है चित्रों में तो बड़े भ्रामक तरीके से किया जाता है। यूँ दिखा दिया जाता है—आपने अर्धनारीश्वर की मुद्राएँ देखी होंगी कि आधे शिव हैं और आधी शक्ति। यह बात बचकानी है। शक्ति ही शक्ति हैं, शिव कहीं…

अपने पर्व पर मुझे जन्म दिया लगा मुझे मैं कृतकृत्य हुआ
पर जैसे-जैसे समझ बढ़ी वैसे-वैसे प्रश्न उठा जो जगत तुमसे ही छल करता उसमें मुझे भेजा क्यों भला
जिस संसार में दुर्पयुक्त होता तुम्हारा ही निशान है उस संसार में बोलो फिर मेरा क्या स्थान है?

प्रश्नकर्ता (प्र): नमस्कार अचार्य जी, आज महाशिवरात्रि है तो महादेव के बारे में कुछ बता दीजिए कि कैसे उनसे हमारी सभ्यता जुड़ी हुई है और कैसे हम मानवों के लिए वे भगवान हैं? किस तरह से वे हमारे लिए उपयोगी हैं? हमें इस तरह से बता दीजिए कि आज ही…

स्त्रियाँ प्रेम में उन्मत्त होकर जिस काम को करने लग जाती हैं, ब्रह्म भी उन्हें उस काम से नहीं हटा सकता।
*~ श्रृंगार शतकम, श्लोक संख्या 54*
जब कोई स्त्री अपने को तुम्हारे चरणों में रख देती है, तब अचानक तुम्हारे सिर पर ताज की तरह बैठ जाती है।

‘वह’ भय [भगवान] अनुस्मारक ध्यान को उपलब्ध होगा, लेकिन रोगी इसेसे बचना चाहेगा।
जो सबसे बड़ी आग में प्रवेश करते हैं, जहाँ वे न तो मर जाते हैं और न ही जीते हैं।।
~ सबसे ऊँचा

‘ईश्वर खींच लेता है जीवों को उनकी मृत्यु के समय, और जिन्हें मृत्यु नहीं आयी उन्हें निद्रा की स्थिति में खींच लेता है। फिर जिन की मृत्यु निश्चित हो चुकी होती है, उन्हें रोक लेता है और शेष को विदा कर देता है, एक निश्चित अवधि…

श्रोता: ‘*अबोर्ड हियर आफ्टर*, एंड इन्डीड द अबोर्ड हियर आफ्टर, इज़ बेस्ट फॉर दी कांशेंशिअस।’
वक्ता: देखिये ये जो बातें उतरती हैं, कही जाती हैं, ये ध्यान की गहराई से कही जाती हैं, शब्द वहां से आते हैं, जो शब्द जिस तल से आ रहा हो, उसको उसी तल…

प्रयत्न साधक:
~ शिव सूत्र
प्रश्नकर्ता: सर, प्रयत्न क्या और साधक कौन?

Ask and it will be given to you; seek and you will find;knock and the door will be opened to you. For everyone who asks receives; the one who seeks finds;and to the one who knocks, the door will be opened.
– Bible, Matthew 7:7-8

वक्ता: शिक़ायत करने में एक बहुत बड़ा सुकून है| शिक़ायतें करना हमारा स्वभाव बन चुका है| यह मानना कि परिस्थितियों ने, समाज ने, पूरी दुनिया ने हमारे साथ कुछ ग़लत किया है, यह कह कर हम अपने आप को बड़ा ढांढस बंधा लेतें हैं| क्योंकि हम जब ये शिक़ायत करतें…
कह रहे हैं कि,…
देखो…
~…
(क़ुरान ८७,९:१९)
चेतावनियाँ, पुकार, आहटें सबको आएँगी, लेकिन जो रोगी मन है वो…
यत्न में हम सब उद्यत रहते हैं। हमारे सारे यत्न भूलने से उपजते हैं। विस्मृत कर देते हैं कि हम हैं कौन, क्या हमारा स्वभाव है और क्या हमें उपलब्ध ही है। ज्यों ये…