


पारस में अरु संत में, बड़ो अन्तरो जान। वो लोहा कंचन करे, ये कर दे आप समान।।~कबीर साहब प्रश्नकर्ता: जैसा कि आप कहते हैं, कि जितना जल्दी हो सके अपने को पूरा अर्पण कर दो, या ख़त्म कर दो, पर यदि इसे समझेंगे और करेंगे, तो अपने अपूर्ण स्थिति…

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\n\n29 अप्रैल से 1 मई, 2022 तक आयोजित हुए वेदांत महोत्सव के एक प्रतिभागी की प्रेरणास्पद कहानी\n\nमेरा नाम राकेश कुमार है। मैं कानपुर नगर से हूँ। पिछले चार माह से मैं हर…

प्रश्नकर्ता: मन, आत्मा और मैं, जैसे कि मैं अतृप्त आत्मा हूँ, हम बोलते हैं या मैं बोलता हूँ तो उसमें से, मैं और अतृप्त चेतना हूँ तो…।
आचार्य प्रशांत: सब पता है क्यों मुस्कुरा रहे हैं? क्योंकि अभी मैं गया भी नहीं, और आपने कहानियाँ बना लीं।

समय तुम्हें इसलिए दिया गया है ताकि समय से आगे जा सको। शरीर तुम्हें इसलिए दिया गया है ताकि शरीर से आगे जा सको। शरीर इसलिए नहीं दिया गया है कि शरीर ही को बचाए पड़े हो, “और दो-सौ साल जिएँगे!” जाते-जाते अपना थोड़ा सा अंश छोड़ गए कि, “इसकी …

जितनी ज़िन्दगी जी चुके हैं ये देखा है कैसे पालक झपकते बीत गयी है? अभी स्कूल में थे, कॉलेज में थे, और अभी बच्चे थे आप, यूँ ही मैदान में, गलियों में दौड़-भाग रहे थे। अभी-अभी! ये जो समय बीता है ये कैसे बीता है? ये चुटकी बजाते बीता है।…

दुनिया के सामने इंसान की तरह खड़े होना सीखो भाई! केंचुए की तरह थोड़े ही कि किसी के भी पाँव के नीचे आ गए। इस चेहरे पर तेज होना चाहिए, आँखों में ताक़त झलकनी चाहिए, कुछ बोलो तो उसमें साहस और संकल्प हो, आवाज़ काँपे नहीं, थरथराए नहीं। एक ज़िंदगी…

जब तुम अपने-आप को बेरोज़गार कहना शुरू कर देते हो, आंतरिक पतन होने लगता है। और वैसे ही पतन होने लगता है उन गृहणियों का जिनके ऊपर अब गृहस्थी की कोई खास ज़िम्मेदारी नहीं है, फिर भी वह घर पर ही बैठी हुई हैं।
मैं समझ सकता हूँ आप काम…

ना संसार से डरो, ना सरकार से डरो, ना डरो दुनिया के तानों से, ना डरो अधूरे अरमानों से, डरो तो बस ज़िंदगी के बर्बाद चले जाने से। घड़ी की टिक-टिक को अपना दोस्त बना लो, हर घण्टे-दो- घण्टे पूछा करो अपने-आप से, “अपने समय का जो मैं ऊँचे-से-ऊँचा, बढ़िया-से-बढ़िया…

स्वामी विवेकानंद अनूठे हैं, बहुत कम तुमने साधु-संत-सन्यासी देखे होंगे जो इतने सुघटित सुडौल शरीर के हों, जितने विवेकानंद थे।
खेल की, कसरत की उनकी दिनचर्या में बंधी हुई जगह थी। और यही नहीं कि बस व्यक्तिगत रुप से खेलते थे, अपने साथियों से कहें – व्यायाम आवश्यक है।
जिस

आदमी यूँ ही नहीं सिगरेट, शराब पीता; उसे कुछ चाहिए जो उसे मिल नहीं रहा इसलिए वो सिगरेट से क्षुधापूर्ति करना चाहता है। एक सिगरेट से बात बनती नहीं इसलिए दूसरी सिगरेट पीता है, दूसरी सिगरेट से भी बात बनती नहीं तो तीसरी पीता है, चौथी पीता है, पीता ही…

हम इज़्ज़त को बहुत बड़ी बात समझ बैठते हैं। हमारे जीवन का, समय का, ऊर्जा का, ध्यान का न-जाने कितना बड़ा भाग सिर्फ़ दूसरों की नज़रों में अपनी छवि चमकाने में लग जाता है, है न?
हमारी एक-एक भावना अन्ततः सिर्फ़ एक उद्देश्य के लिए है – इस शरीर को…

कुछ साल मिले हैं जगने के लिए, उसके बाद तो खूब सोना है। तो यह तुम कैसे आदत अभी पाले हुए हो कि, “ज़रा और सो लें एक घण्टा, दो घण्टा”?
भीतर एक चेतना होनी चाहिए, लगातार एक गूंज होनी चाहिए कि, “लंबे पाँव पसार कर के अनंत समय के…

खाली समय मिला है तो क्या करना है? “चल न! मोहल्ला घूम कर आते हैं, बाज़ार देखकर आते हैं”, या कहीं नहीं जाना तो, “चल न, टीवी देखते हैं।“ ख़ुद को नहीं देखना है!
अपनी हालत क्या है, उससे बिलकुल बचकर रहना है। अपनी हालत का कुछ पता नहीं, टीवी…

जिस आदमी के पास स्वार्थ नहीं है वो बहुत ख़तरनाक हो जाता है, क्योंकि अब उसे मजबूर किया नहीं जा सकता; तुम उसकी जान ले सकते हो, उसे मजबूर नहीं कर सकते हो। जिसे मजबूर किया जा सकता हो, जिसे ग़ुलाम बनाया जा सकता हो; जान लो कि ऐसे ही…

मैं वनडे(एक दिवसिय) देखता नहीं, टी-२० देखता नहीं, मैं सिर्फ़ टेस्ट मैच देखता हूँ; वह भी तब जब भारत जाता है – वो ही जो सेना कंट्रीज़ हैं चार, साउथ अफ्रीका, इंग्लैंड, न्यूज़ीलैंड, ऑस्ट्रेलिया – और उसमें भी तब देखता हूँ जब टीम की हालत बिलकुल ख़राब हो, क्योंकि…

तुम वही हो न जो रात में टिकटॉक पर बैठते हो और दो घण्टे लगा देते हो सोने से पहले? ये तुम्हारे समय की कीमत है! तुम्हारे समय की कीमत होती, तो तुम सोशल मीडिया पर इतना समय कैसे लगा रहे होते? तुम्हारे समय की कीमत होती तो तुम अपने…

युवा होने का अर्थ होता है कि सुडौल शरीर हो, चौंड़ी छाती, मज़बूत कंधे और विराट ह्रदय। दुनिया की समझ, दुनिया की सारी क्रांतियाँ जवान लोगों ने करी हैं। और ‘क्रांति’ से मेरा मतलब पत्थरबाजी और हुल्लड़ नहीं है। क्रांति बहुत समझदार लोगों का काम होती है, क्रांति का मतलब…

देश का जो सबसे बड़ा लफंगा हो, अगर वह देश का सबसे बड़ा टीनएज सेलिब्रिटी भी बन गया हो, तो माँ-बाप को समझ जाना चाहिए कि अब बहुत ज़बरदस्त ख़तरा है।
टीनएज (किशोर) लड़कियों को भगत सिंह का पता हो न हो, खुदीराम बोस का पता हो न हो, विनय…

मैं जितने भी कपटी लोगों से मिलता हूँ, उनकी धूर्तता की कोई सीमा नहीं। उनका दिमाग चल रहा है। वो महत्वकांक्षी हैं। वो कुछ भी कर दिखाने को तैयार हैं। उनमें ऊर्जा पूरी है, वो दुनिया पर छा जाने के लिए हौसला रख रहे हैं। उनका आत्मविश्वास देखो!
और मैं…

आचार्य प्रशांत: सिर्फ़ इसलिए कि तुम्हें शरीर मिला है इंसान का तो तुम इंसान नहीं हो गए।
इंसान बस वो है जो चुनौतियों के सामने बिलकुल छाती खोल कर खड़ा हो जाए। कहे, “आओ!” जैसे सुबह हो गई हो, ऊर्जा आ गई हो शरीर में कि सामने चुनौती खड़ी हो…

एक ज़िंदगी है, दबे-दबे जीने में क्या मज़ा है भाई? तुम किस चीज़ को सुरक्षित कर रहे हो? जीवन माने समय ही तो होता है न? डरे-डरे समय बिता रहे हो, तो तुमने सुरक्षित किस चीज़ को रख लिया है? समय डर में बिता दिया तो तुमने बचा क्या लिया?…

आचार्य प्रशांत: हिंदुस्तान में जानते हो न दस-लाख लोग आवेदन भरते हैं और चयन होता है दो-सौ का। ऐसे ही चलता है न? कितना प्रतिशत हुआ ये? प्रश्नकर्ता: एक-प्रतिशत भी नहीं हुआ। आचार्य: कितना हुआ? तुम्हें अध्यात्म की नहीं, मैथ्स (गणित) की ज़रूरत है। ऐसे नहीं किसी भी काम में…

आपका साथी कैसा है, वो आपको नहीं पता चलेगा जब तक वह आपके साथ है। उसको जानना चाहते हैं तो उस दिन जानिएगा जिस दिन वह आपको छोड़ता है। फिर देखिएगा उसका चेहरा!
जब किसी का आपसे कोई स्वार्थ ना बचे और फिर भी वह आप के प्रति सद्भावना रखे,…

यहाँ तक बताना सबको अच्छा लगता है, “हमें भी आईएएस बनना है”। उसके आगे जैसे ही पूछो न, “क्यों बनना है?” बताने में फिर एक दिक़्क़त हो जाती है । फिर मेरे जैसा हाल हो जाएगा, मुझे पता चल गया था कि क्यों बनना है। तो फिर मैंने हाथ खींच…

प्रश्नकर्ता: प्रणाम आचार्य जी, मैं अनुशासित नहीं रह पाता और मेरे मन में कामुक विचार छाए रहते हैं। अभी आपने जो बताया कि उलझना ही ठीक नहीं, तो मुझे ये समझ नहीं आता कि अगर मैं इन कामुक विचारों से न उलझूँ, तो मुझे फिर मुक्ति कैसे मिलेगी?
आचार्य…

आचार्य प्रशांत: एक आदमी था बड़ा भुल्लकड़। कोई एक चीज़ उसके साथ रहती थी, वो थी उसकी विस्मृतिशीलता। भूलता गया, भूलता गया, और एक दिन पाता है कि वो अपनी हँसी भी भूल गया; भूल ही गया कि हँसना कैसे है।
तो गया एक विशेषज्ञ के पास, कि, “हँसना भूल…

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी प्रणाम। जीवन में आगे बढ़ने के लिए मन बहुत कुछ पाना चाहता है; मूलतः इसमें आर्थिक लाभ भी छुपा होता है। लेकिन पाँच-छह महीने कुछ करा और फिर कुछ और करने को मन चाहता है। मन को समझने का प्रयास किया, आप के कुछ वीडियोज़ (चलचित्र) देखे।…

प्रश्नकर्ता: प्रणाम आचार्य जी! पिछले दो दिनों में मैंने सफलता और व्यवसाय के ही विषय में आपसे जिज्ञासा की। आपको सुन रहा हूँ, गुन रहा हूँ। चाहता हूँ कि जो व्यवसाय करूँ उसमें आपसे सुने वक्तव्यों की सुगंध मौजूद हो। आज की अर्थव्यवस्था को देखते हुए, बाज़ार को मद्देनजर रखते…

प्रश्नकर्ता: प्रतियोगी परीक्षाओं में लगातार असफल होने के बाद मैं अब सांसारिक प्रयासों से अनासक्त हो गया हूँ। क्या अध्यात्म में मुझे शरण प्राप्त हो सकती है ताकि मुझे सांसारिक प्रयत्न फिर करने ही ना पड़ें?
आचार्य प्रशांत: *रॉंग नंबर*। ऐसे थोड़ी है की इधर से पिट गए, उधर से…

प्रश्नकर्ता: ध्यान केंद्रित करने का सबसे अच्छा तरीका क्या है?
आचार्य: ध्यान केंद्रित कैसे करें। अभी सुन रहे थे तुम?
प्र: जी सर।

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी प्रणाम! कुछ ही महीने हुए हैं आपसे यूट्यूब के माध्यम से जुड़े हुए। 'वैराग्य शतकम' का इक्कीस्वाँ श्लोक मुझे सता रहा है, मेरे वजूद पर सवाल उठा रहा है। मैं कॉर्पोरेट में काम कर रहा हूँ तीन साल से, आप समझ ही गए होंगे मैं पापियों के…

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, दैनिक जीवन में कभी-कभी थक जाता हूँ, जिस कारण अपने कार्यों को अच्छे से कर नहीं पाता। मेरी मदद करें!
आचार्य प्रशांत: क्या काम है जो करना चाहते हो?
प्रश्नकर्ता: जैसे कि बहुत पढ़ना होता है।

प्रश्नकर्ता: क्या सफ़लता सब कुछ होती है समाज के लिए? क्या हमें सिर्फ सफ़लता से ही मतलब होना चाहिए।
आचार्य प्रशांत: समाज तो यही चाहता है! समाज तो यही चाहता है कि तुम एक पूर्व निर्धारित राह पर चलो और उस राह पर जो जितनी ज़ोर से चले और जितनी…

प्रश्नकर्ता: जैसे राबिया और हसन के वक्त में राबिया ने कहा कि सत्य बताने का एक टाइम आएगा और तभी तुम उस बात को जानोगे क्या इसकी तुलना ऐसे हो सकती है कि जब तक अपना वक्त नहीं आता, अच्छे वक्त की चाभी नहीं मिलती।
आचार्य प्रशांत: बहुत बुरा वक्त…

प्रश्नकर्ता: जब मेरे दिमाग में कोई भी विचार आता है, थॉट आता है, मुझे खुद भी नहीं पता होता कि मैं क्यों सोच रहा हूँ यह सब। जब भी मैं कोई काम करने जा रहा होता हूँ या पढ़ रहा होता हूँ, वह मेरे को फ़ोकस नहीं करने देता, कंसंट्रेशन…

प्रश्नकर्ता: सर, एकाग्रता की कमी क्या है?
आचार्य प्रशांत: बेटा, जहाँ भी एकाग्रता है न, वहाँ विकर्षण पहले ही मौजूद है। तुम किस को विकर्षण बोलती हो? जब एक वस्तु की ओर मन को केन्द्रित करना चाहती हो और मन दूसरी और दिशाओं में भाग रहा है, तो तुम क्या…

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, हाल ही में मुझे अभी वॉलन्टीयरिंग (स्वयं सेवा) का मौका मिला था तो मैं और मेरे सहयोगी ने तय किया कि हम आपके द्वारा जो पुस्तकें प्रकाशित हैं उनका स्टॉल लगाएँगे। जब वहाँ पहुँचा तो पाया कि इतने सारे लोगों में कौन इन किताबों का पात्र है…

(दिवस 1)
प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, प्रणाम।
मेरा नाम निधीश है। शुरू से ही मैं निर्णय लेने में बहुत कमज़ोर रहा हूँ। मैंने इंजीनियरिंग करने का निर्णय भी दूसरों के प्रभाव में लिया था। इंजीनियरिंग ख़त्म हो चुकी है और अब मुझे आगे के करियर का चुनाव करना है। आप से…

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, स्वामी विवेकानंद के जीवन से क्या सीख मिलती है? अध्यात्म और जवानी में क्या सम्बन्ध है?
आचार्य प्रशांत: देखो, किताबी ज्ञान देने वाले तो हमेशा से बहुत रहे हैं। स्वामी विवेकानंद अनूठे हैं उस आदर्श से जो उन्होंने जी कर प्रस्तुत किया। बहुत कम तुमने साधु-संत, सन्यासी…

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, आपके वीडियो में एक बात सुनी थी, वो बात मन में ठहर गई। अब जो भी हरकत करता हूँ, जो भी गलती करता हूँ, तो उस वीडियो में सुनी उस बात को याद कर लेता हूँ, और उसी के संदर्भ में सीखने का प्रयास करता हूँ।
आपने…

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, प्रणाम। बच्चों को लेकर चिंतित रहती हूँ। क्या औरत को सिर्फ़ घर में एक चूल्हे में सिमट जाना चाहिए? वो आगे बढ़ने की कोशिश करे या परिवार के दायित्व में बंध कर रह जाए? और बच्चे भी उसी में उलझ गए हैं, वो आगे बढ़ने की कोशिश…

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, आपकी सफलता के पीछे क्या राज़ है?
आचार्य प्रशांत: राज़ कुछ भी नहीं है। बात सिर्फ इतनी सी थी कि सक्सेस (सफलता) वगैरह का कभी बहुत सोचा नहीं। हर कदम पर जो उचित लगा वो करता गया, उसी से अगला कदम निकलता चला गया। सक्सेस की बात…

प्रश्नकर्ता: प्रणाम आचार्य जी, मुझे अपने कैरियर के प्रति उलझाव सा रहता है। जो काम मुझे करना पसंद है, वह मैं कर रहा हूँ। लेकिन उस काम में जॉब सिक्योरिटी मुझे नहीं दिखती। और इस कारण मैं हमेशा ही चिंतित रहता हूँ। कृपा करके इसका समाधान बताएँ।
आचार्य प्रशांत: ये…

प्रश्नकर्ता: ऊँचा जीवन कैसे जीएँ? आदर्शों को अपने जीवन में कैसे अपनाएँ?
आचार्य प्रशांत: जिसको भी तुम मानते हो अपने से ऊँचा, जिसको भी सम्माननीय मानते हो, उसकी छवि लगातार आँखों में बसी रहे। और आँखें ऐसी हैं नहीं कि जब तक वो भौतिक रूप से न देखें तब तक…

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, क्या सफलता सिर्फ़ कठोर परिश्रम (हार्ड-वर्क) कर के ही पाई जा सकती है?
आचार्य प्रशांत: देखो, ये प्रश्न बहुत अच्छा उदाहरण है ऐसे सभी सवालों का जिसमें बहुत सारी चीज़ें मान ली गई हैं।

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, मेरा सवाल ब्यूरोक्रेसी (नौकरशाही) से है। हमारे ऊपर जो अधिकारी हैं, क्या उन्हें जागरूक नहीं होना चाहिए? हम लोग भी सोचते हैं कि अगर हमारा बॉस थोड़ा जागरूक होता, तो वो और अच्छे निर्णय ले सकते था।
आचार्य प्रशांत: ऐसा आप सोचती हैं अपने बॉस के बारे…

प्रश्नकर्ता: मैं एक जिला-स्तरीय क्रिकेट खिलाड़ी हूँ। मेरे जीवन में ढर्रे हैं और वो मुझे खेल में आगे बढ़ने से बहुत रोक रहे हैं। तो एक युवा होने के नाते किस तरीके से मैं आगे अनुशासन के साथ इस खेल में उतर सकता हूँ? मैं देश के लिए खेलना चाहता…
प्र: जी।
आचार्य: ध्यान से? क्या उसके लिए कोई विधि लगाई ध्यान केंद्रित करने के लिए?
प्र: नहीं, यहाँ पर तो नहीं लगाई…
प्रश्नकर्ता: जैसे मैं GATE की…