
प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, जैसे मैं पहले किसी सत्संग में जाती थी, वहाँ पर कुछ बातें बतायी जाती थीं। अष्टावक्र गीता पर आपने बताया कि आज यहाँ पर उसकी उपयोगिता नहीं है। और अष्टावक्र जी ने जैसे बताया है कि ब्रह्म-ही-ब्रह्म है, आत्मा-ही-आत्मा है। तो अभी कुछ दिन पहले मैं अपने…


नकली चीज़ों का बाज़ार देखो, कई बार असली वस्तु से ज़्यादा गर्म होता है। और जो ख़रीदने वाले हैं वह जानते हैं कि मामला नकली है पर ख़रीदते हैं। भारत में रे-बैन के असली चश्मे कितने बिकते हैं, मुझे नहीं पता, नकली घर-घर में हैं। और ऐसा थोड़े-ही है कि…

चेतना ना बचे उसके बाद देह का हश्र भी देखा है? दो दिन पुराना मुर्दा भी देखा है, कैसा हो जाता है? यह है इस देह की औक़ात। बड़ी सुंदरता निखारते फिरते हो! यह जितने प्रेमी घूम रहे हैं, देह के, यह पास आने से घबराएँगे।
मर जाओगे उसके ४…

आप खाना खा रहे हों, कोई आ जाए कहे, “खाना दे दो।“ आप उसको आधा भी मत दीजिए, पूरा ही दे दीजिए। पर कोई आ करके आपसे आपकी आज़ादी ही माँगने लग जाए तो इतनी-सी भी मत दीजिएगा। थाली और आज़ादी में कुछ तो अंतर होगा।
आपके पास चार रोटी…

जितनी ज़िन्दगी जी चुके हैं ये देखा है कैसे पालक झपकते बीत गयी है? अभी स्कूल में थे, कॉलेज में थे, और अभी बच्चे थे आप, यूँ ही मैदान में, गलियों में दौड़-भाग रहे थे। अभी-अभी! ये जो समय बीता है ये कैसे बीता है? ये चुटकी बजाते बीता है।…

हवाई जहाज का टिकट बुक कराना है और आपका नाम है ‘अमित’ तो आपको 'AMIT' ही लिखना होगा। 'अमित' लिखकर आप हवाई जहाज में यात्रा करके दिखा दीजिए।
आप कह दीजिए कि, “'अ मि त' नाम है मेरा”, तो आप हवाई जहाज में यात्रा नहीं कर पाएँगे।
ट्रेवल बुकिंग, …

अजीब सी स्थिति ये है कि एक साधारण सी दिखनेवाली लड़की से शायद ज़्यादा मुश्किल है एक सुंदर लड़की की ज़िंदगी। क्योंकि उसके खरीददार बहुत ज़्यादा हैं, और उसे बहुत कुछ मिल जाएगा। और यह जो तुमको बहुत कुछ मिल जाएगा न अपनी सुंदरता के कारण, यही नर्क है तुम्हारा।…

जो भी लोग जीवन में तरक़्क़ी करने को उत्सुक हों, उनको एक बहुत छोटी सी बात बताए देता हूँ। सीढ़ी है, बस जो सामने पायदान है उसपर नज़र रखना। यह कोशिश तो करना ही नहीं कि ऊपर देख रहे हो, कि वह जो बिलकुल आख़िरी तल्ला है सीधे उसपर छलाँग…

बहुत तकलीफ़ हो रही है मुझे यह कहते हुए कि हमारे देश का औसत नौजवान, औसत लड़का, औसत लड़की एक अब औसत पॉर्नस्टार बन चुका है। और बहुत ज़िम्मेदारी के साथ मैं यह बात बोल रहा हूँ। और मैं कुछ गिने-चुने पॉर्नस्टार्स की बात नहीं कर रहा हूँ, मैं इस…

ये जो तुमको ताक़त दी जाती है जवानी में, ये इसलिए है कि इसका इस्तेमाल कर लो और उड़ जाओ। इस्तेमाल नहीं करोगे तो सज़ा ये मिलेगी कि अस्सी साल जीयोगे। अस्सी साल जीने से ज़्यादा भयानक कोई सज़ा हो सकती है? अस्सी चुसे हुए साल और हर बीतते साल…

ज़िंदगी में इतनी बड़ी चुनौती अपनाकर तो देखो कि वो तोड़ ही डाले तुम्हें, और फिर पाओगे तुम कि टूटने के बाद भी बचे हो। कुछ है तुम्हारे भीतर जो ऐसा जुड़ा हुआ है कि टूटता नहीं। सबकुछ टूटने के बाद जो बचा रहता है वो असली है। उसका कुछ…

मैं तो ऐसा भी सुन चुका हूँ कि, ”सर मेरी गर्लफ़्रेंड मुझे छोड़ कर चली गई।“ क्यों? “वो मैं हफ़्ते भर से रात को गीता के श्लोक फॉरवर्ड किया करता था व्हाट्सएप पर, वो चाहती थी कि मैं कुछ और भेजूँ उसको रात में होटम-हॉट। मैंने भेज दिए गीता के…

कोई नहीं किसी पर चिल्ला सकता, कोई नहीं किसी पर हक़ जमा सकता, कोई नहीं किसी पर हाथ उठा सकता, आप ने कभी-न-कभी अधिकार उसको दिया है, और अधिकार तो हमेशा खरीदा ही जाता है। उसने अधिकार खरीदा है आपसे कुछ आपको दे करके। कुछ अधिकार ऐसे होते हैं जो…

तुम वही हो न जो रात में टिकटॉक पर बैठते हो और दो घण्टे लगा देते हो सोने से पहले? ये तुम्हारे समय की कीमत है! तुम्हारे समय की कीमत होती, तो तुम सोशल मीडिया पर इतना समय कैसे लगा रहे होते? तुम्हारे समय की कीमत होती तो तुम अपने…

जो लोग दस दरवाज़ों पर खटखटा रहे होते हैं न उन बेचारों की त्रासदी यही होती है, वह ऐसे होते हैं जैसे कि कोई दस जगह गड्ढा खोदे।
यह ग्रंथों का अपमान है कि उनको एक बार पढ़ कर के किनारे रख दो। “मैंने गीता पढ़ ली!” कि, “मैंने बाइबल…

जिसके हाथ में ताक़त नहीं, वो बस उपभोग की वस्तु होगा। आदमी कहाँ से निकला है? जंगल से। और जंगल में प्रेम नहीं होता। जंगल में शिकारी होता है, और शिकार होता है। या जंगल में हीर-राँझा होता है? जो बाहुबल में ऊँचा हो वो क्या हो जाएगा? शिकारी। जो…

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, सामान्यत: तो हम ऐसे होते हैं कि अपने लिए कर्म करते हैं, अपने हित का सोचते हैं। और अपने लिए ना करने का चुनाव, यह करने वाले भी क्या हम ही होते हैं?
आचार्य प्रशांत: वो तो एक सुंदरता होती है जो तुमको असहाय कर देती है,…

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, किसी काम में पूरी तरह डूब नहीं पाता और मन यहाँ-वहाँ भागता है, एकाग्र नहीं हो पाता। मन को एकाग्र कैसे करूँ?
आचार्य प्रशांत: छोटी बीमारी हटाना चाहते हो, या बड़ी बीमारी?

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, ऐसा लगता है कि किसी घोड़े पर बैठा हुआ था, और घोड़े को अपना शरीर जान रहा था। तो अब घोड़े से उतर गया हूँ। लेकिन घोड़ा अपनी रफ़्तार से चल रहा है, और मैं रुका हुआ हूँ। सारा बैलेंस (संतुलन) बिगड़ा हुआ लगता है। कभी लगता…

आचार्य प्रशांत: बहुत अच्छा सवाल है। तुम्हारा नाम क्या है?
श्रोता: रोहित।
आचार्य जी: रोहित, रोहित पूछ रहा है कि यथार्थता और औचित्य के बीच अंतर क्या है? और आप में से जो भी लोग आज और कुछ ना समझ पाएं, बस इस सवाल को समझ लें।

आचार्य प्रशांत: सही भाषा, एक सही जीवन का ‘सहायक-फल’ है।
श्रोता: सही जीवन बता दीजिये क्या है?
आचार्य जी: ग़लत जीवन क्या है, पहले वो समझते हैं! ग़लत जीवन वो है, जो तुम जीते हो।

प्रश्न: आचार्य जी, अचानक गुस्सा क्यों आता है?
आचार्य प्रशांत: बल्ब चालू करते हो, कितना टाइम लगता है बल्ब को जलने में? सब कुछ अचानक हो जाता है ना? हम भी वैसे ही हैं।
प्रश्नकर्ता: लेकिन बाद में दुःख होता है ना, कि हमने गलत किया !

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, बोध-शिविर से फ़ायदा क्या है?
आचार्य प्रशांत: आदमी, शरीर के ऊपर चढ़ी हुई समाज की परत है। जिसको अपना जन्म कहते हो, वो शरीर के साथ होता है। और फिर समाज उस पर एक परत और चढ़ा देता है। ये दोनों ही परतें तुम्हारा दुःख हैं। ये…

प्रश्न: हमें पता होता है कि जो लोग हैं उन्हें हमसे कोई मतलब नहीं है, तब भी हमारे मन में ये ख़याल आ जाता है कि लोग क्या सोचेंगे। ऐसा क्यों होता है?
आचार्य प्रशांत: ये सिर्फ़ तुम्हारे नहीं, मेरे मन में भी आ जाता है। इसमें कौन-सी बड़ी बात…

प्रश्नकर्ता: सर, सच्चा आनंद क्या है जीवन में?
आचार्य प्रशांत: झूठा आनदं भी कुछ होता है?

प्रश्न: आचार्य जी, ऐसा क्यों होता है कि लोग बहुत परेशान, दुःखी और तनाव से भरे हुए रहते हैं?
आचार्य प्रशांत: तनाव कहाँ से आता है?

प्रश्न: आचार्य जी, ये घटना मेरे साथ घट चुकी है, वो बता रहा हूँ । एक बार मैं अपने घर, लखनऊ जा रहा था । तो एक माँ और उनके साथ एक बहुत छोटा बच्चा बैठा था । मैं उनके पास ही बैठा था । रास्ते में एक पेड़…

आचार्य प्रशांत: तुम ये कह रहे हो, कि मेरे दृष्टिकोण से परिणाम पर अंतर पड़ता है के नहीं? ये कह रहे हो? ये जानना चाहते हो?
तो, ये तो तुम सब सोचते ही यही हो ।

अन्धः तमः प्रविशन्ति ये विद्यामुपासते
ततो भूयः इव ते तमो य उ विद्यां रताः
ईशोपनिषद

प्रश्न: सर, क्या हो अगर जिस स्थिति को हम संभाल रहे हैं और जो हमारे जो हमारे मूल्यों में अंतर्विरोध हो।
आचार्य प्रशांत: नाम क्या है तुम्हारा?
श्रोता

आचार्य प्रशांत: क्या नाम है?
श्रोता: सर, राकेश।
वक्ता: राकेश, ये सवाल पूछना ज़रूरी था क्या? तुम्हारे लिए था ज़रूरी? तुमनेंं, तुम्हारे बगल में जो बैठा है, उससे अनुमति ली क्या सवाल पूछने के लिए? जो उधर बैठा है, उससे अनुमति ली? मेरे हाथ में माइक

आचार्य प्रशांत: हम सब ये चाहते हैं कि निर्दोष रहें। तो ऐसे में वो स्थिति हम सबको सुहाती है जिसमें हमें ये एहसास हो कि हम में कोई खोट नहीं, हम में कोई दोष नहीं, क्योंकि निर्दोषिता स्वभाव है न। ऐसा माहौल जो तुम्हें ये एहसास करा दे, थोड़ी ही…

प्रश्नकर्ता: सर, जो हम बचपन से करते आ रहे हैं, उससे कैसे हटें?
आचार्य प्रशांत: इस कमरे में तुम्हारे बचपन से अँधेरा है। यहाँ पर एक बल्ब जला दूँ, तो रौशनी होने में क्या दो-चार साल लगेंगे? कितना समय लगेगा?

वक्ता: सम्मान वो नहीं है, जो हम समझते हैं। वो डर बस है। सम्मान के नाम पर हम डरे रहते हैं कि अगर किसी का सम्मान करते हो, तो उसके सामने मुँह न खोलो। वो डर बस है। सम्मान शब्द का अर्थ भी बस इतना ही होता है: ठीक से…

श्रोता: सर, हमारा मन बुराइयों को बहुत जल्दी स्वीकार करता है और अच्छाइयों को बहुत देरी से स्वीकार करता है। ऐसा क्यों? ऐसा क्या अंतर है इन दोनों में?
वक्ता: हम अच्छाई को देर से क्यों स्वीकारते हैं? बुराई की तरफ क्यों भागते हैं? मन बुराई की तरफ क्यों आकर्षित…

प्रश्न: सर, आपने बताया था कि हमारा मन इसीलिए परेशान रहता है क्योंकि उसको, उससे भी बड़ा कुछ चाहिए होता है| जो सामान्य विचार आते हैं, वो काफ़ी नहीं हैं कि उसको शांत कर पाए, उसको उससे भी बड़ा कुछ चाहिए, उसको उसके स्रोत की तलाश होती है| तो क्या…

वक्ता: देखिये, ये अदब है ज़िन्दगी जीने का। हम बच्चों को ना अपने, बड़े ही सतही एटिकेट सिखाते हैं। जीवन भी एक सम्मान माँगता है। हमको वो सम्मान देना नहीं आता, हमें सतही अदब तो आता है। कुछ मैनर्स ,एटिकेट हम जान गए पर उसके आगे की बात हम नहीं…

प्रश्न: सर, एक छोटा बच्चा जो अपने माँ-बाप को ठीक से नहीं पहचानता उसे स्कूल भेज दिया जाता है। वो बच्चा फिर अलग-अलग चीज़ें सीखता है, मिसाइल बनाना सीखता है। तो ये शिक्षा प्रणाली सही है या गलत?
वक्ता: तुम्हें पता है। बिलकुल ठीक बात है। जिस मन को अभी…

प्रश्न: सर, दूसरों को समझाना बड़ा आसान होता है लेकिन जब खुद पर बात आती है तो इन्सान अमल नहीं का पाता। ऐसा क्यूँ?
वक्ता: मज़ा आता है न। दूसरे को समझाना बड़े मज़े की चीज़ है। हम दूसरे को समझा-समझा के खुद को ये दिलासा दिए रहते हैं कि…

आचार्य प्रशांत: पुण्य, आचरण की बात नहीं है। ‘पुण्य’ किसी विशिष्ट आचरण की बात नहीं है और ना ही अच्छाई किसी निर्धारित प्रकार से आचरण करने की बात है और ना ही पुण्य बात है एक ख़ास विषय के बारे में विचार करने या ना करने से। पर भरा तो…

श्रोता: सर, मैं देखती हूँ कभी-कभी कि कोई मेरे बारे में कुछ बोल देता है तो चोट लग जाती है। ये क्यूँ होता है?
वक्ता: उम्मीद रहती है तुम्हें कि कुछ अच्छा-अच्छा बोल देंगे, जब बुरा-बुरा बोल देते हैं तो बुरा लग जाता है। जो बात है वो तो बड़ी…

वक्ता: संदीप(श्रोता की ओर इशारा करते हुए) पूछ रहा है अपने ही लिए जीना चाहिए या दूसरों के लिए भी? हमारी कुछ ज़िम्मेदारियाँ हैं जिन्हें हमें निभाना पड़ेगा जैसे बेटा हूँ, भाई हूँ। चलो, संदीप खुद ही बोलो।
श्रोता: सर, अब तक तो हम सोच रहे थे कि जिम्मेदारियों…

वक्ता: एक कॉलेज में था और सभी छात्रों से बात कर रहा था; काफ़ी चिंतित लग रहे थे सब। अभी-अभी रिज़ल्ट निकला है, जनवरी की बात थी, बैक आ गयीं हैं। अब संवाद चल रहा है और मुँह लटका के बैठे हैं तो मैंने कहा कि ऐसे नहीं बात करुँगा…

आचार्य प्रशांत: ये मत पूछो कि, ‘ मुझे कैसे पता कि मेरा एक्शन पूर्णतया सही है या नहीं?’ ज़्यादा ईमानदारी की बात यह है कि, ‘मुझे जो चीज़ पता है कि सही है, मैं वो भी कर पा रहा हूँ या नहीं?’ ग़लती यह नहीं है कि कोई पूर्णतया सही…

आचार्य प्रशांत: मैत्री को अगर समझना हो तो इस प्रकरण को ठीक-ठीक देख लें।
सुदामा माँगता नहीं, कृष्ण पूछ कर देते नहीं, जता कर देते नहीं। और दोनों ओर से मैत्री का इससे प्रगाढ़ उदाहरण नहीं मिल सकता। एक है जो कह रहा है कि "मुझे माँगना ही नहीं!" और…

प्रश्नकर्ता: सर, दो छोर जैसा लगता है। जब आध्यात्मिक पुस्तक पढ़ती हूँ, तो मन शांत रहता है और अगर कोई और पुस्तक पढ़ती हूँ, तो अशांति रहती है मन में। या तो दोनों में मन शांत रहे। या फिर दोनों में ही मन में अशांति रहे।
आचार्य प्रशांत: कोई ऐसा…

प्रश्नकर्ता: सर, अपने जीवन में सब कुछ बनाए कैसे रखें? ऐसे कैसे जीयें, कि सब कुछ ठीक रहे?
आचार्य प्रशांत: मान लो कि तुम अपने किसी दोस्त के साथ हो। तुम्हें एक किस्सा सुनाता हूँ, और ये मेरे साथ वाकई हुआ है। मैं अपने किसी दोस्त के साथ था, ठीक…

प्रश्न: ‘रिचुअल्स’ (धार्मिक अनुष्ठान) का क्या महत्त्व है?
वक्ता: बहुत थोड़े समय के लिए जब मन स्वयं अपनी जागृति में कहे कि, “ऐसा-ऐसा करो, और निरंतर करो, इससे शान्ति मिलती है,” तब उस निरंतरता का नाम ‘रिचुअल’ है। जब वो निरंतरता भी अपनी है, भीतर से उठती है, तब तो…

वक्ता: तो हम पूछ रहे हैं कि जब इन पक्षियों के पास कुछ करने को नहीं है तो यह इतने मज़े क्यों कर रहे हैं, इतना इधर-उधर भाग क्यों रहे हैं, उड़ क्यों रहे हैं?
क्योंकि तुम्हारा सबसे बड़ा खौफ़ ही यही है कि अगर तुम्हारे पास कुछ करने को…
अभी एक पिक्चर देखी ‘छिछोरे’, आईआईटी बॉम्बे पर आधारित है वो। कैंपस में चालीस लड़कों पर एक लड़की है। लेकिन वो जो लड़की है उसका कहानी में जो कुल योगदान है वो यही है कि वो सुंदर-सुंदर है और सब लड़के उसके पीछे पड़े हैं।
तो पूरी कहानी में लड़कों…
आचार्य: बड़ी बीमारी हट गई तो छोटी अपने आप हट जाएगी।
अक्सर…
श्रोता: वही जानना चाहता हूँ।
आचार्य जी: ग़लत…
आचार्य…
आचार्य जी: तुम इसका…
अन्धः तमः प्रविशन्ति ये विद्यामुपासते
ततो भूयः इव ते तमो य उ विद्यां रताः
~ ईशोपनिषद
जो अविद्या कि उपासना करते हैं, वो गहरे…
वक्ता: भरत? भरत कह रहा है, “क्या हो अगर कि जिस स्थिति का मैं सामना कर रहा…